बॉलीवुड में हॉरर फिल्मों की जब भी बात आती है तो वो सबसे पहला ना जो लिया जाता है वो है रामसे बद्रर्स का. रामसे बद्रस ने लगभग दो दशक तक बॉलीवुड को एक से बढ़ कर एक हॉरर फिल्में दी, जो उस दौर में जबरदस्त हिट रही और आज भी उन्हें देखा जाता है. 'महल' (1949) जैसी क्लासिक फिल्मों और 1960 की 'बीस साल बाद' (1962), 'गुमनाम' और 1965 में 'भूत बंगला' के बाद, रामसे ब्रदर्स ने लगभग दो दशकों तक हॉरर फिल्मों की दुनिया पर राज किया.
उनकी कुछ फिल्में बेहद कम बजट में बनीं लेकिन फिर भी जबरदस्त हिट रहीं. 'पुराना मंदिर' (1984) और 'वीरान' (1988) जैसी फिल्में कम बजट में बनने के बावजूद बॉक्स-ऑफिस पर बहुत बड़ी हिट रहीं, लेकिन जिस फिल्म ने सबसे पहले चर्चा बटोरी, वह थी 1978 में आई फिल्म 'दरवाजा'. इस प्रोजेक्ट के लिए, रामसे ब्रदर्स, तुलसी रामसे और श्याम रामसे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर मेकअप आर्टिस्ट क्रिस्टोफर टकर से संपर्क किया.
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फिल्म दरवाजा इतनी बड़ी हिट साबित हुई कि डिस्ट्रीब्यूटर्स ने दर्शकों को खुलेआम चुनौती दी कि वे इसे थिएटर में अकेले देखें, और ऐसा करने की हिम्मत दिखाने वाले किसी भी व्यक्ति को 10,000 रुपये का नकद इनाम देने की पेशकश की.
हॉलीवुड से आया मेकअप आर्टिस्ट
रामसे फैमिली की तीसरी पीढ़ी दीपक रामसे और अमित रामसे ने 'दरवाजा' की कहानी को याद किया. 'श्रेष्ठ भारत' से बात करते हुए, दीपक ने बताया, "आज आपके पास अपनी पसंद का मेकअप करवाने के कई विकल्प हैं. उस समय, बहुत कम मेकअप आर्टिस्ट ऐसे थे जो सच में डरावना लुक तैयार करना जानते थे. स्टार्स चेहरे पर कट का निशान होने पर भी सुंदर दिखना पसंद करते थे, जबकि रामसे की दुनिया में, लोगों को डराने के लिए आपको डरावना दिखना जरूरी था. कुछ इंडियन मेकअप आर्टिस्ट तो थे, लेकिन हमें लंदन से भी मेकअप मंगवाना पड़ा. तभी हमने क्रिस्टोफर टकर से संपर्क किया."
उन्होंने आगे कहा, "कुमार जी और तुलसी जी लंदन में उनसे मिले और उन्हें बताया कि हमारा बजट बहुत ज़्यादा नहीं था, लेकिन हमें उनकी विशेषज्ञता की जरूरत थी. वे हमारी सीमाओं के भीतर काम करने के लिए सहमत हो गए और 'दरवाजा' के लिए मेकअप भेजा. हमने उन्हें पाउंड में भुगतान किया. बजट थोड़ा बढ़ गया था, लेकिन जब फिल्म थिएटर में रिलीज हुई, तो उसने बॉक्स-ऑफ़िस पर जबरदस्त कमाई की. फिल्म का बिज़नेस शानदार रहा."
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थिएटर के बाहर खड़ी रहती थी एंबुलेंस
फिल्म की लोकप्रियता को याद करते हुए दीपक ने कहा, "आप इसे पब्लिसिटी स्टंट कह सकते हैं, लेकिन एक डिस्ट्रीब्यूटर ने घोषणा की थी कि जो कोई भी थिएटर में अकेले 'दरवाजा' फिल्म देखेगा, उसे 10,000 रुपये नकद इनाम मिलेगा. थिएटर के बाहर एक एम्बुलेंस भी खड़ी की गई थी. फिल्म इतनी लोकप्रिय थी. लेकिन किसी ने भी इसे अकेले देखने की हिम्मत नहीं की. 'दरवाजा' के मेकअप ने बाद में बनी कई हॉरर फिल्मों को प्रेरित किया."
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