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56 साल पहले आया था मोहम्मद रफी का ये गाना, बेवफा महबूबा के लिए मांगी थी खुश रहने की दुआ, आज भी आंखें कर देता है नम

मोहम्मद रफी की आवाज में वो दर्दभरा गाना, जिसे सुनकर याद आ जाएगी अधूरी मोहब्बत, 1970 में हुई थी रिलीज. जिसे सुनते ही आज भी आंखे हो जाती है नम.

56 साल पहले आया था मोहम्मद रफी का ये गाना, बेवफा महबूबा के लिए मांगी थी खुश रहने की दुआ, आज भी आंखें कर देता है नम
मोहम्मद रफी की आवाज में वो दर्दभरा गाना, जिसे सुनकर याद आ जाएगी अधूरी मोहब्बत
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नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में कुछ ऐसे गाने होते हैं जिनको सुनकर लगता है कि कोई अपने दिल का पूरा दर्द बयां कर रहा है. आज हम 70 के दशक के एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे जिसको मोहम्मद रफी ने आवाज से सजाया. हम बात कर रहे हैं सदाबहार गाने कि जो है 'खुश रहे तू सदा'.  जो साल 1970 में आई फिल्म 'खिलौना' का था. ये  गाना आज भी उन लोगों के दिल को छू जाता है, जिन्होंने कभी किसी को खोने का दर्द महसूस किया है. इस गाने की खास बात है इसके बोल जिसमें अपने से शिकवा, शिकायत और टूटा हुआ दिल होने के बावजूद दिल से दुआ देता है. तो चलिए जानते हैं इस गाने की कहानी. 

शादी के दिन टूटा दिल, फिर भी महबूबा के लिए मांगी खुशियों की दुआ

56 साल पुराने गाने की खासियत है इसके शुरुआती बोल हैं, 'तेरी शादी पे दूं तुझको तोहफा मैं क्या, पेश करता हूं दिल एक टूटा हुआ'. गाने में एक प्रेमी नजर आता है जो अपनी प्रेमिका को किसी और का होता देखकर भी उसकी खुशियों के लिए दुआं मांग रहा है. मोहम्मद रफी ने इस दर्द को जिस अंदाज में गाया, वह सीधे दिल तक पहुंचता है. गाने को फिल्म में संजीव कुमार पर फिल्माया गया था. 3 मिनट 36 सेकंड के इस गाने का हर बोल अपने आप में एक अलग ही एहसास लिए हुए है. गाने के बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे और इसका संगीत तैयार किया था लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने. गाने के हर बोल में प्रेमी के दिल के दर्द का एहसास होता है. गाने के बोल इस तरह हैं-

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तेरी शादी पे दूँ तुझको तोहफ़ा मैं क्या
पेश करता हूँ दिल एक टूटा हुआ
खुश रहे तू सदा ये दुआ है मेरी
खुश रहे तू सदा ये दुआ है मेरी
बेवफ़ा ही सही
बेवफ़ा ही सही दिलरुबा है मेरी
खुश रहे

संजीव कुमार, मुमताज और शत्रुघ्न सिन्हा की थी फिल्म

फिल्म 'खिलौना' 8 अप्रैल 1970 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. फिल्म का निर्देशन चंदर वोहरा ने किया था और इसके निर्माता एलवी प्रसाद थे. फिल्म में संजीव कुमार ने विजयकमल, मुमताज ने चांद और शत्रुघ्न सिन्हा ने बिहारी का किरदार निभाया था. वहीं जितेंद्र ने फिल्म में मोहन के रोल में नजर आए थे. फिल्म की कहानी गुलशन नंदा ने लिखी थी. इसमें विजयकमल अपनी प्रेमिका सपना को किसी और से शादी करते देखकर अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है. इसके बाद उसकी जिंदगी में चांद आती है, जिसे परिवार उसकी देखभाल के लिए घर लाता है. कहानी में प्यार, दर्द और कई रिश्तों की कहानी देखने को मिलती है.

फिल्म ने जीते थे दो फिल्मफेयर अवॉर्ड

फिल्म 'खिलौना' सिर्फ अपने गानों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी कहानी और इसमें मौजूद एक्टर्स की अदाकारी के लिए भी याद की जाती है. फिल्म को 1971 के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट फिल्म का पुरस्कार मिला था. वहीं मुमताज को इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. फिल्म के साउंडट्रैक में कुल 6 गाने थे. जिन्हें मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर, किशोर कुमार, आशा भोसले और मन्ना डे जैसे गायकों ने अपनी आवाज दी थी.

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