हिंदी सिनेमा में कुछ गाने ऐसे हैं, जो सिर्फ सुने नहीं जाते. उनकी पिक्चराइजेशन ऐसी है कि वे दर्शकों के दिल और यादों में हमेशा के लिए बस चुके हैं. पर्दे पर कलाकारों की अदाकारी, भावनाएं और संगीत का मेल उन्हें एक अलग पहचान दे देता है. एक गाने ने 51 साल पहले पर्दे पर रोमांस, दर्द और जुनून का कुछ ऐसा ही नजारा पेश किया था. आज भी इस गाने की धुन सुनते ही दर्शकों के सामने एक शानदार अदाकारा का वो खास अंदाज याद आ जाता है, जब उन्होंने अपने किरदार के लिए ऐसा परफॉर्म किया था कि हर कोई हैरान रह गया था. धर्मेंद्र के लिए फिल्माया गया यह सीन आज भी बॉलीवुड के सबसे यादगार पलों में गिना जाता है. यह गाना शोले फिल्म का 'जब तक है जान' है.
शोले का वो यादगार पल, जिसे आज भी नहीं भूले फैंस
1975 में रिलीज हुई फिल्म शोले हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक मानी जाती है. फिल्म ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचा, बल्कि इसके किरदार और गाने आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं. इसी फिल्म का गाना 'जब तक है जान, मैं नाचूंगी' अपने समय से काफी आगे का गाना था. इस गाने को हेमा मालिनी पर फिल्माया गया था. उन्होंने बसंती के किरदार में ऐसा जबरदस्त प्रदर्शन किया कि यह सीन अमर हो गया. फिल्म में बसंती अपने प्यार वीरू यानी धर्मेंद्र के लिए कांच के टुकड़ों पर नाचने को मजबूर होती है. इस दर्दभरे और भावुक सीन में हेमा मालिनी की अदाकारी ने दर्शकों को भावुक कर दिया था.
लता मंगेशकर की आवाज और आरडी बर्मन के संगीत का जादू
'जब तक है जान' को स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी. उनकी मधुर और इमोशनल आवाज ने गाने के दर्द को और गहरा बना दिया. वहीं इस यादगार गीत का संगीत तैयार किया था मशहूर संगीतकार आरडी बर्मन ने. गाने के बोल और धुन ने बसंती के किरदार की मजबूरी, प्यार और हिम्मत को बखूबी पेश किया. यही वजह है कि इतने साल बाद भी यह गाना लोगों की पसंदीदा प्लेलिस्ट में शामिल है.
गाने के बोल ऐसे हैं-
हाँ, जब तक है जाँ, जान-ए-जहाँ मैं नाचूँगी
हाँ, जब तक है जाँ, जान-ए-जहाँ मैं नाचूँगी
हाँ, जब तक है जाँ, जान-ए-जहाँ मैं नाचूँगी
हो-ओ-ओ, हो, जब तक है जाँ, जान-ए-जहाँ मैं नाचूँगी
प्यार कभी भी मरता नहीं
मौत से भी ये डरता नहीं
प्यार कभी भी मरता नहीं
मौत से भी ये डरता नहीं
लूट जाएँगे, मिट जाएँगे, मर जाएँगे हम
ज़िंदा रहेगी हमारी दास्ताँ
हो-ओ-ओ, हो, जब तक है जाँ, जान-ए-जहाँ मैं नाचूँगी
गाना शूट करना था बेहद मुश्किल
"फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने इस गाने को फिल्माते समय क्या दिक्कते आईं इनके बारे में भी बताया है, रमेशा जी ने बताया कि, इस गाने को फिल्माना बहुत मुश्किल था, पत्थर बहुत गर्म था. तपती धूप के नीचे हेमा को नाचना पड़ा. शूट से पहले तैयारी होती थी, एक कपड़ा बिछाया जाता था, जब क्लोजप शॉट लिए जाते थे. लेकिन जब सिर्फ पैर के शॉट और पत्थर लेना होता तो उनको करना ही पड़ा. उन्होंने बहुत हिम्मत दिखाई और गाना कर लिया."
शोले सिर्फ फिल्म नहीं, हिंदी सिनेमा की विरासत है
रमेश सिप्पी की डायरेक्शन में बनी शोले को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है. अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया बच्चन और अमजद खान जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म ने कहानी, एक्टिंग और संगीत के मामले में नए मुकाम हासिल किए. जय-वीरू की दोस्ती, गब्बर का खौफ और बसंती की चुलबुली अदाएं आज भी लोगों को याद हैं. फिल्म के हर किरदार ने अपनी अलग पहचान बनाई है.
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