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45 साल पुराना वो गाना जब फांसी पर टंगे बाप-बेटा कर रहे थे चने की बात, फिल्म ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, मनोज कुमार-दिलीप कुमार बने देश की आवाज

45 साल पहले ‘क्रांति’ के गाने ‘चना जोर गरम’ में फांसी के फंदे पर खड़े दिलीप कुमार और मनोज कुमार ने चने की पुकार में ऐसा देशभक्ति का संदेश छिपाया कि यह गीत आज भी अनोखा माना जाता है.

45 साल पुराना वो गाना जब फांसी पर टंगे बाप-बेटा कर रहे थे चने की बात, फिल्म ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, मनोज कुमार-दिलीप कुमार बने देश की आवाज
क्रांति फिल्म का यह गाना आज भी है यादगार

साल 1981 में आई मनोज कुमार की फिल्म ‘क्रांति' सिर्फ एक ऐतिहासिक फिल्म नहीं थी, बल्कि देशभक्ति सिनेमा का ऐसा अध्याय बनी, जिसे आज भी याद किया जाता है. फिल्म का गाना ‘चने जोर गरम' सुनने में भले ही चने बेचने वाले की पुकार जैसा लगता है, लेकिन पर्दे पर इसका अंदाज बिल्कुल अलग था. खास बात यह थी कि फिल्म के एक बेहद गंभीर मौके पर दिलीप कुमार और मनोज कुमार फांसी के फंदे में नजर आए और उसी दौरान ‘मेरा चना है अपनी मर्जी का' जैसे बोल गूंजे. मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, लता मंगेशकर और नितिन मुकेश की आवाजों से सजा यह गाना देशभक्ति के रंग में ऐसा रंगा कि आज भी अनोखा लगता है.

चने की पुकार में छिपा था आजादी का संदेश

‘चना जोर गरम' को संतोष आनंद ने लिखा था और इसका संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया. गाने को लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार और नितिन मुकेश ने अपनी आवाज दी. यही इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक है कि हिंदी सिनेमा के तीन दिग्गज गायकों के साथ नितिन मुकेश की आवाज सुनाई दी. सरेगामा के रिकॉर्ड में भी यही क्रेडिट दर्ज हैं. 

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गाने की शुरुआत चना जोर गरम बेचने की आम पुकार से होती है, लेकिन आगे इसके बोल अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष और देश के लिए लड़ने के जज्बे की तरफ मुड़ जाते हैं. ‘मेरा चना है अपनी मर्जी का' वाला हिस्सा इसी वजह से सिर्फ मजाकिया या हल्का-फुल्का नहीं रह जाता, बल्कि फिल्म की कहानी और आजादी के संघर्ष से जुड़ जाता है.

फांसी के फंदे पर दिलीप कुमार-मनोज कुमार का वो सीन

इस गाने की सबसे यादगार बात उसका फिल्मांकन है. एक तरफ गाने में चने की बात और मस्ती भरा अंदाज है, तो दूसरी तरफ दिलीप कुमार और मनोज कुमार फांसी के फंदे के सामने खड़े दिखाई देते हैं. ‘क्रांति' में दिलीप कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई, जबकि मनोज कुमार उनके बेटे के किरदार में थे. फिल्म की कहानी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह और स्वतंत्रता संघर्ष पर आधारित थी.

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दिलचस्प बात यह है कि मनोज कुमार ने खुद बाद में बताया था कि उन्होंने इस गाने को फिल्म के गंभीर माहौल को थोड़ा हल्का करने के लिए लिखा था, लेकिन चने को देशभक्ति से जोड़ने वाले बोलों ने इसे एक अलग ही पहचान दे दी. इसीलिए गाना सुनने में मनोरंजक होते हुए भी फिल्म के राष्ट्रवादी तेवर से पूरी तरह जुड़ा रहा.

‘क्रांति' ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास

‘क्रांति' 3 फरवरी 1981 को रिलीज हुई और उस दौर की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल थी. फिल्म में दिलीप कुमार, मनोज कुमार, शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, हेमा मालिनी, परवीन बाबी, सरिका, प्रेम चोपड़ा समेत बड़ी स्टारकास्ट थी. इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले सलीम-जावेद ने लिखे थे, जबकि निर्देशन और निर्माण मनोज कुमार ने किया था. 

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फिल्म की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बॉक्स ऑफिस इंडिया के मुताबिक दिल्ली-यूपी में ही पहले 10 हफ्तों में इसका नेट कलेक्शन करीब 1.26 करोड़ रुपये रहा और पूरे रन में यह आंकड़ा 3 करोड़ रुपये से ऊपर चला गया. उस समय इस इलाके में सिर्फ कुछ ही फिल्में 3 करोड़ नेट का आंकड़ा पार कर पाई थीं. 

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यानी ‘चना जोर गरम' सिर्फ एक गाना नहीं था. चने की साधारण-सी पुकार को देशभक्ति के संदेश में बदलकर इस गीत ने ‘क्रांति' की कहानी को और यादगार बना दिया. और फांसी के फंदे के सामने दिलीप कुमार-मनोज कुमार का वह सीन इसे हिंदी सिनेमा के सबसे अनोखे देशभक्ति गीतों में शामिल कर गया.

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