आज के समय में लोग किसी फिल्म का सबसे दमदार सीन सोशल मीडिया पर कुछ मिनटों में देख लेते हैं. लेकिन 90 के दशक में ऐसा नहीं था. उस दौर में बड़े पर्दे पर किसी स्टार की एंट्री ही फिल्म देखने की सबसे बड़ी वजह बन जाती थी. साल 1993 में रिलीज हुई एक फिल्म ने ऐसा ही कमाल किया था. हालात ये थे कि कई सिनेमाघरों में इंटरवल के बाद भी टिकट खिड़की पर भीड़ लगी रहती थी. वजह सिर्फ एक थी, सनी देओल की दमदार एंट्री. जैसे ही वो स्क्रीन पर आते, पूरा थिएटर तालियों और सीटियों की आवाज से गूंज उठता.
इंटरवल के बाद बढ़ जाती थी दर्शकों की भीड़
राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी 'दामिनी' अपने समय की सबसे पॉपुलर फिल्मों में से एक थी. फिल्म में मीनाक्षी शेषाद्री, ऋषि कपूर और अमरीश पुरी जैसे बड़े सितारे थे, लेकिन सनी देओल की एंट्री दूसरे हाफ में होती थी. इसके बावजूद उनका इंतजार दर्शक बेसब्री से करते थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई के बांद्रा टॉकीज में इंटरवल तक करंट बुकिंग चलती रहती थी, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग सिर्फ सनी देओल का हिस्सा देखने थिएटर पहुंचते थे.
कुछ मिनटों का रोल, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा
फिल्म में सनी देओल ने वकील गोविंद का किरदार निभाया था. उनका रोल पूरी फिल्म में ज्यादा लंबा नहीं था, लेकिन जितनी देर वो स्क्रीन पर रहे, उतनी देर उन्होंने पूरी महफिल लूट ली. कोर्टरूम में बोले गए उनके डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं. खास बात ये रही कि इस किरदार के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड और फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. यही वजह है कि 'दामिनी' का नाम लेते ही सबसे पहले सनी देओल का चेहरा याद आता है.
आज भी याद किया जाता है ये थिएटर एक्सपीरियंस
30 अप्रैल 1993 को रिलीज हुई 'दामिनी' सिर्फ एक हिट फिल्म नहीं थी, बल्कि ये उस दौर के सबसे यादगार सिनेमाघर एक्सपीरियंस में भी शामिल हो गई. फिल्म ने महिलाओं को न्याय दिलाने की कहानी को दमदार तरीके से दिखाया और दर्शकों का दिल जीत लिया. 33 साल बाद भी जब इस फिल्म की बात होती है, तो इंटरवल के बाद थिएटर में उमड़ती भीड़ और सनी देओल की गूंजती दहाड़ का किस्सा जरूर सुनने को मिलता है.
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