नतीजे चौंकाने वाले होंगे... ओबामा, बाइडेन से लेकर अमेरिकी मीडिया और ईरान को ट्रंप ने सुनाई खूब खरी-खोटी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध के कारण अपने ही देश में घिर गए हैं. विपक्ष उनको लगातार घेर रहा है. यहां तक की अमेरिकी मीडिया भी इस युद्ध में ट्रंप की रणनीति को लेकर सवालिया निशान लगा रही है. आज ट्रंप ने सभी बातों का जवाब दिया.

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ट्रंप ने ईरान को समझदारी दिखाने की सलाह दी है.
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  • डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध और वार्ता के मुद्दे पर अपने ट्रूथ सोशल पर विस्तृत बयान दिया है
  • ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ उनकी सैन्य कार्रवाई अपेक्षा से तेज हुई पर बेहतर समझौते के लिए दबाव में नहीं आए
  • उन्होंने पूर्व JCPOA समझौते को देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक और अपमानजनक बताया और उसे समाप्त करने का बचाव किया
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐलान के बाद भी सोमवार को ईरान इस्लामाबाद वार्ता करने नहीं पहुंचा. अमेरिकी मीडिया में ट्रंप की किरकिरी हो रही है. विपक्ष उन पर लगातार निशाना साध रहा है. ऐसे में अपने सभी विरोधियों को ट्रंप ने एक साथ आज निशाने पर लिया और अपने ट्रूथ सोशल पर ईरान युद्ध की एक-एक बात बताई. उन्होंने साफ किया कि वो जल्दी में नहीं हैं, हां थोड़ी देर हो रही है, पर नतीजे चौंकाने वाले होंगे. 

ट्रंप ने क्या कहा

ट्रंप ने आज लगातार तीन ट्वीट कर लिखा, 'डेमोक्रेट ईरान के संबंध में हमारी मजबूत स्थिति को कमजोर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं. प्रथम विश्व युद्ध 4 साल, 3 महीने और 14 दिन, द्वितीय विश्व युद्ध 6 साल और 1 दिन, कोरियाई युद्ध 3 साल, 1 महीने और 2 दिन, वियतनाम युद्ध 19 साल, 5 महीने और 29 दिन और इराक युद्ध 8 साल, 8 महीने और 28 दिन तक चला. इसके बावजूद वे कहते हैं कि मैंने ईरान को हराने के लिए 6 सप्ताह का वादा किया था, जबकि वास्तव में सैन्य दृष्टिकोण से यह उससे कहीं अधिक तेजी से हुआ था, लेकिन मैं उन्हें अमेरिका को ऐसे समझौते के लिए मजबूर नहीं करने दूंगा जो उतना अच्छा न हो जितना हो सकता था. मैंने फर्जी खबरें पढ़ीं, जिनमें कहा गया है कि मुझ पर समझौता करने का "दबाव" है. यह सच नहीं है! मुझ पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं है, हालांकि, यह सब अपेक्षाकृत जल्दी ही हो जाएगा! समय मेरा दुश्मन नहीं है, मायने सिर्फ इतना रखता है कि आखिरकार 47 साल बाद हम उस गड़बड़ी को ठीक करें, जो दूसरे राष्ट्रपतियों ने ईरान के मामले में इसलिए होने दी क्योंकि उनमें वो साहस या दूरदर्शिता नहीं थी कि वे जरूरी कदम उठा सकें. हम इसमें लगे हुए हैं, और इसे सही तरीके से करेंगे, और हम उन कमजोर और दयनीय डेमोक्रेट्स, जो गद्दार हैं, को, जो सालों से ईरान के खतरों की बात करते आ रहे हैं और कहते आ रहे हैं कि कुछ किया जाना चाहिए, लेकिन अब, क्योंकि मैं खुद ये कर रहा हूं, हमारी सेना और ट्रंप प्रशासन की उपलब्धियों को कमतर नहीं आंकने देंगे. यह ऑपरेशन वेनेजुएला के पैमाने पर पूरी तरह से अंजाम दिया जा रहा है, बस एक बड़ा और ज्यादा जटिल ऑपरेशन है. नतीजा वही होगा. अपने पहले कार्यकाल में, मैंने अंतरिक्ष बल को शामिल करते हुए, हमारे देश की अब तक की सबसे बड़ी सेना का निर्माण किया. अपने दूसरे कार्यकाल में, मैं अपनी सेना का सही और विवेकपूर्ण तरीके से इस्तेमाल कर रहा हूं ताकि उन समस्याओं को हल कर सकूं, जो हमसे कहीं कम समझदार या कम सक्षम लोगों ने हमारे लिए छोड़ी हैं. अमेरिका को फिर से महान बनाओ!'

ईरान के साथ हम जो समझौता कर रहे हैं, वह JCPOA (जिसे आमतौर पर "ईरान परमाणु समझौता" कहा जाता है) से कहीं बेहतर होगा. बराक हुसैन ओबामा और सुस्त जो बाइडन द्वारा तैयार किया गया यह समझौता हमारे देश की सुरक्षा से जुड़े सबसे खराब समझौतों में से एक था. यह परमाणु हथियार हासिल करने का एक निश्चित रास्ता था, जो हमारे मौजूदा समझौते के साथ न तो होगा और न ही हो सकता है. उन्होंने वास्तव में 17 लाख डॉलर नकद दिए, बोइंग 757 में भरकर ईरान भेजे ताकि ईरानी नेतृत्व इसे अपनी इच्छानुसार खर्च कर सके. उन्होंने वाशिंगटन डी.सी., वर्जीनिया और मैरीलैंड के बैंकों से सारा पैसा निकाल लिया. उन बैंकरों ने कहा कि उन्होंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा. इसके अलावा, ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर का भुगतान किया गया. अगर मैंने उस "समझौते" को खत्म नहीं किया होता, तो इजराययल और पूरे मध्य पूर्व में, जिसमें हमारे प्रिय अमेरिकी सैन्य अड्डे भी शामिल हैं, परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जाता. वॉशिंगटन पोस्ट के हल्के-फुल्के "पत्रकार" डेविड इग्नाटियस जैसे फर्जी समाचार फैलाने वाले लोग जेसीपीओए के बारे में बात करना पसंद करते हैं, जबकि वे जानते हैं कि यह खतरनाक था और हमारे देश के लिए पूरी तरह से शर्मनाक था. अगर "ट्रंप" के नेतृत्व में कोई समझौता होता है, तो यह न केवल इजरायल और मध्य पूर्व के लिए, बल्कि यूरोप, अमेरिका और दुनिया भर के लिए शांति, सुरक्षा और संरक्षा की गारंटी देगा. यह कुछ ऐसा होगा जिस पर पूरी दुनिया गर्व करेगी, न कि उन वर्षों की शर्मिंदगी और अपमान के लिए जो हमें अक्षम और कायर नेतृत्व के कारण झेलने के लिए मजबूर होना पड़ा है!

 ट्रंप ने लिखा, 'इजरायल ने मुझे ईरान के साथ युद्ध के लिए कभी राजी नहीं किया, लेकिन 7 अक्टूबर के नतीजों ने मेरी इस पुरानी राय को और पुख्ता कर दिया कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता. मैं फर्जी खबरों के विश्लेषकों और सर्वेक्षणों को पूरी तरह अविश्वास से देखता और पढ़ता हूं. उनकी 90% बातें झूठ और मनगढ़ंत कहानियां हैं, और सर्वेक्षणों में धांधली हुई है, ठीक वैसे ही जैसे 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में हुई थी. वेनेजुएला के नतीजों की तरह, जिनके बारे में मीडिया बात करना पसंद नहीं करता, ईरान के नतीजे भी चौंकाने वाले होंगे - और अगर ईरान के नए नेता (सत्ता परिवर्तन!) समझदार हैं, तो ईरान का भविष्य उज्ज्वल और समृद्ध हो सकता है! '

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