- इजराइल-अमेरिका और ईरान में सीधी जंग होती है तो इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र और तमाम देशों पर पड़ेगा
- युद्ध सीमित दायरे में रहा तो कुछ उथल-पुथल के साथ भारत के लिए हालात संभालने लायक बन रहेंगे
- होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत की गैस-तेल सप्लाई में बाधा आई है, जिसका कई क्षेत्रों में असर दिखने लगा है
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच सैन्य टकराव के अब गंभीर नतीजे सामने आने लगे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का सीधा असर गैस की सप्लाई, तेल की कीमतों और जरूरत की अन्य चीजों पर पड़ने लगा है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. वह अपनी जरूरत का करीब 40 फीसदी तेल खाड़ी देशों से ही इंपोर्ट करता है. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि अगर इस जंग का दायरा बढ़ा तो भारत पर क्या और कितना असर पड़ सकता है. आइए समझते हैं-
संभावना 1 - पूर्ण युद्ध
क्या होगाः विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जंग को लेकर चार प्रमुख संभावनाएं बन सकती हैं. इनमें पहली और सबसे खतरनाक स्थिति पूर्ण युद्ध की है. अगर ईरान, इजराइल और संभवतः अमेरिका के बीच सीधा सैन्य टकराव होता है, तो इसका दुष्प्रभाव पूरे खाड़ी क्षेत्र के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर और तेल सप्लाई पर पड़ेगा.
भारत पर असर
- भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत तेल आयात करता है. ऐसे में जंग का दायरा बढ़ा तो कच्चे तेल की कीमतों में आग लगेगी और भारत सीधे चपेट में आएगा.
- तेल महंगा होने से भारत में महंगाई बढ़ेगी और देश का व्यापार घाटे और ज्यादा बढ़ने का खतरा रहेगा.
- युद्ध अगर लंबा चला तो इस महंगाई का असर देश की आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ सकता है.
लेबनान के बेरूत में इजरायली एयरस्ट्राइक ने काफी तबाही मचाई है. Photo Credit: PTI
संभावना 2 - सीमित संघर्ष
क्या होगाः एक संभावना ये है कि ये युद्ध सीमित दायरे में ही रहे. पूर्ण युद्ध के बजाय छिटपुट हमले या प्रॉक्सी वॉर देखने को मिलें. ऐसी नौबत आई तो वैश्विक बाजार में अस्थिरता तो रहेगी, लेकिन तेल आपूर्ति में कोई बड़ा झटका लगने की संभावना कम होगी. युद्ध को फैलने से रोकने के लिए देशों की सरकारें और वैश्विक संस्थान राजनयिक दबाव बना सकते हैं.
भारत पर असर
- ऐसी स्थिति भारत के लिए चुनौतीपूर्ण तो होगी लेकिन मैनेज करने लायक रहेगी. वित्तीय बाजारों में कुछ समय के लिए उथल-पुथल हो सकती है. कुछ अवरोध के साथ खाड़ी देशों के साथ व्यापार जारी रह सकता है.
- भारत के इजराइल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ संतुलित संबंध रहे हैं, जो इस मुश्किल वक्त में उसे कूटनीतिक रास्ता निकालने में मददगार साबित हो सकते हैं.
भारत के कई शहरों में एलपीजी सप्लाई को लेकर लोगों में चिंता दिख रही है. Photo Credit: IANS
संभावना 3 - होर्मुज में नाकाबंदी
क्या होगाः होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया में तेल सप्लाई का सबसे प्रमुख मार्गों में से एक है. दुनिया की कुल तेल सप्लाई का 20 पर्सेंट यहीं से होकर गुजरता है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से यहां से तेल टैंकरों और जहाजों की आवाजाही ठप है. अगर ये नाकाबंदी लंबी चली तो इसके गहरे असर हो सकते हैं.
भारत पर असर
- भारत अपने कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है. होर्मुज के ठप होने से टैंकरों की आवाजाही कम हुई है. इसका असर भारत में दिखने लगा है.
- गैस की कमी होने लगी है. सरकार को दखल देना पड़ा है. सरकार ने गैस के बंटवारे की प्राथमिकता तय कर दी है. कंपनियों से गैस उत्पादन बढ़ाने को कहा है. स्थानीय स्तर पर गैस के इस्तेमाल में कटौती भी की जा रही है.
- सरकार का हालांकि दावा है कि पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार है, लेकिन टैंकरों की आवाजाही जल्द शुरू नहीं हुई तो यह भी दबाव में आ सकता है.
- शिपिंग और इंश्योरेंस की लागत पहले ही बढ़ चुकी है. भारत के कई औद्योगिक क्षेत्र ऊर्जा की बढ़ती लागत का दबाव महसूस करने लगे हैं.
संभावना 4 - सीजफायर
क्या होगाः ईरान युद्ध की सबसे राहतभरी स्थिति यही हो सकती है कि सीजफायर हो जाए. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का मेन मकसद उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है. हालांकि अब तक हुई तीन दौर की बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. लेकिन ट्रंप ने आगे बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया है. हालांकि ईरान अभी अड़ा हुआ है. अगर ईरान परमाणु डील के लिए तैयार हो जाता है तो सीजफायर की संभावना बढ़ जाएगी.
भारत पर असर
- भारत में गैस और तेल का संकट खत्म हो जाएगा. होर्मुज के रास्ते आवाजाही शुरु होने से सप्लाई बहाल होगी और चीजों की किल्लत खत्म हो जाएगी.
- भारत की आर्थिक अनिश्चतताएं भी दूर हो सकती हैं. एनर्जी मार्केट्स में ऐसी संभावनाओं पर तेल के दामों में तुरंत गिरावट देखी गई है. इसका मतलब ये कि हालात तेजी से सामान्य हो सकते हैं और वैश्विक अनिश्चितता कम हो जाएगी.
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