- ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति के कारण कई पश्चिमी और एशियाई देश चीन के साथ अपने संबंध पुनः स्थापित कर रहे हैं
- यूरोपीय स्थिरता तंत्र ने यूरोप की रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए सैन्य ऋण देने की योजना बनाई है
- मिडिल ईस्ट के कई देश चीन के साथ संबंध मजबूत कर रहे हैं, जिससे अमेरिका की वैश्विक स्थिति कमजोर हो रही है
ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' और आक्रामक व्यापारिक नीतियों के बीच, 2026 की शुरुआत में ही कई प्रमुख पश्चिमी और एशियाई देशों ने चीन के साथ अपने रिश्तों को 'रीसेट' करना शुरू कर दिया है. यूरोप, ब्रिटेन और कनाडा अब अमेरिका के बजाय चीन के साथ संबंध सुधारने की ओर देख रहे हैं. जानिए कैसे ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति वैश्विक राजनीति में अमेरिका को अलग-थलग कर रही है.
यूरोप मान चुका अब अमेरिका साथी नहीं
यूरोपीय स्थिरता तंत्र (ईएसएम) के प्रमुख ने रॉयटर्स को बताया है कि 430 अरब यूरो (514 अरब डॉलर) से अधिक की सैन्य क्षमता वाला यूरोपीय संकट कोष डिफेंस के लिए देशों को ऋण दे सकता है, क्योंकि यूरोपीय संघ अपनी सेना को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. यूरोपीय स्थिरता तंत्र के प्रबंध निदेशक पियरे ग्रामेग्ना ने कहा कि ईएसएम रक्षा के लिए ऋण दे सकता है और बदले में कठोर आर्थिक सुधारों की मांग नहीं करेगा.
ग्रामेग्ना ने कहा, "जियो-पॉलिटिकल उथल-पुथल के इस समय में सभी देशों ने डिफेंस बजट में बढ़ोतरी की है. हमें ईएसएम की पूरी क्षमता का उपयोग करना चाहिए." उन्होंने अच्छी वित्तीय स्थिति वाले लेकिन सीमित बजट वाले देशों, विशेष रूप से छोटे यूरो जोन राज्यों के लिए रक्षा ऋण के उपयोग की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा, "हमारे पास साधन हैं. यूरोप के सर्वोत्तम हित में है कि हम पूरी क्षमता का उपयोग करें. यह साफ है कि यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संबंध दिन-ब-दिन और अधिक अस्थिर होते जा रहे हैं."
अमेरिका की जगह ले रहा चीन
हाल के हफ्तों और महीनों में चीन के दरवाजे पर दस्तक देने वाले मुख्य देश और उनके नेता इस प्रकार हैं:
- ब्रिटेन (UK): प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर 29 जनवरी 2026 को बीजिंग पहुंचे. यह 8 साल में किसी ब्रिटिश पीएम का पहला चीन दौरा है. इस दौरान चीन ने ब्रिटिश नागरिकों के लिए 30 दिनों की वीजा-मुक्त यात्रा का ऐलान किया और एस्ट्राजेनेका ने चीन में $15 बिलियन के निवेश की घोषणा की.
- कनाडा (Canada): प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 12-17 जनवरी 2026 के दौरान चीन की यात्रा की. उन्होंने चीन के साथ एक 'नई रणनीतिक साझेदारी' पर हस्ताक्षर किए. विशेष रूप से, कनाडा ने चीन से आने वाली इलेक्ट्रिक कारों पर टैरिफ को 100% से घटाकर 6.1% करने का बड़ा फैसला लिया है.
- आयरलैंड (Ireland): आयरिश प्रधानमंत्री (Taoiseach) माइकल मार्टिन ने 4-8 जनवरी 2026 के बीच चीन का दौरा किया. यह 14 साल में किसी आयरिश पीएम की पहली चीन यात्रा थी, जिसे यूरोपीय संघ और चीन के बीच बिगड़ते रिश्तों को संभालने की कोशिश के रूप में देखा गया.
- फिनलैंड (Finland): फिनिश प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो 24-29 जनवरी 2026 तक चीन में रहे. इस दौरान 11 वाणिज्यिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए और फिनलैंड ने 'यूरोपीय रणनीतिक स्वायत्तता' की बात दोहराई.
- दक्षिण कोरिया (South Korea): राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने जनवरी 2026 की शुरुआत में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. ट्रंप की अनिश्चित नीतियों के बीच दक्षिण कोरिया अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन के साथ तनाव कम करना चाहता है.
- फ्रांस (France): राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दिसंबर 2025 के अंत में चीन का दौरा किया था, जहां उन्होंने परमाणु ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन पर कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए.
- जर्मनी (Germany): जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी आने वाले हफ्तों में चीन यात्रा का कार्यक्रम तय किया है.
मिडिल ईस्ट भी चीन के साथ
यूरोप की तरह ही हमेशा से मिडिल ईस्ट के देशों ने अमेरिका का साथ दिया है. मगर अब वो भी चीन के साथ धीरे-धीरे संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं. सऊदी अरब से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक चीन से अपने संबंधों को बेहतर बनाने में लगे हैं. नाटो सदस्य तुर्की तो ब्रिक्स में शामिल होने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. पाकिस्तान के तो पहले से ही चीन से बहुत अच्छे संबंध हैं. इस तरह से अगर देखें तो ट्रंप के आने के बाद उसके यूरोप और खाड़ी के साथी धीरे-धीरे चीन की तरफ झुकते दिख रहे हैं.
Photo Credit: AFP
अमेरिका के कट्टर दुश्मन भी चीन के साथ
अमेरिका के सबसे पुराने दुश्मन रूस की भी करीबी चीन के साथ बहुत बढ़ गई है. रूस का व्यापार भी काफी हद तक चीन पर निर्भर हो चुका है. ऐसे में फिलहाल चीन को अब हर स्तर पर सपोर्ट करना रूस की एक तरह से मजबूरी भी हो चुकी है. इसी तरह से उत्तर कोरिया और ईरान भी चीन के भरोसे ही अमेरिका से दो-दो हाथ करने की चुनौती देते रहते हैं. साफ है कि अमेरिका के दोस्त और दुश्मन दोनों चीन के पाले में जा चुके हैं. भारत और ब्राजील जैसे मध्यमार्गी देशों को भी ट्रंप ने MAGA के कारण अपने से कोसों दूर कर रखा है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप MAGA बना पाते हैं या फिर चीन को वो सौंप दे रहे हैं, जिसका उसे दशकों से इंतजार था.
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