शून्य भारत की देन है, जिसका दुनिया कर रही इस्तेमाल : इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल

इतिहासकार और लेखक विलियम डेलरिम्पल के अनुसार शून्य और वे संख्याएं जिनका आज पूरी दुनिया में उपयोग होता है, भारत की देन हैं और इनका आविष्कार गुप्त काल में, विशेष रूप से चंद्रगुप्त द्वितीय के समय हुआ था. शून्य का विकास ब्राह्मी लिपि से होता हुआ ग्वालियर के शिलालेखों तक पहुंचा और फिर आधुनिक देवनागरी, अरबी लिपि तथा पश्चिमी अरबी अंकों के रूप में विकसित हुआ, जिनका उपयोग दुनियाभर में किया जा रहा है. 

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