डोनाल्ड ट्रम्प आज दुनिया के सबसे अनप्रेडिक्टेबल नेता बन चुके हैं. एक बयान, एक सोशल मीडिया पोस्ट या एक फैसला और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, राजनीति और बाजार हिल जाते हैं. सवाल यही है - ट्रम्प दुनिया को चला रहे हैं या दुनिया ट्रम्प के मूड के हिसाब से चल रही है?ट्रम्प की राजनीति की स्टाइल T20 क्रिकेट जैसी है. कभी टैरिफ बढ़ा दो, कभी वापस ले लो. कभी दोस्त, अगले दिन दुश्मन. कभी जंग, कभी शांति. ईरान मुद्दे पर यही पैटर्न दिखा - एक दिन हमले की धमकी, दूसरे दिन बातचीत. 2 दिन में स्ट्रेट ऑफ से गुजरने वाले जहाजों पर 20% फीस का ऐलान, फिर अगले दिन पलट गए. खुद को 'एक्सट्रीमली स्टेबल जीनियस' बताने वाले ट्रम्प के लिए कोई स्थायी नियम नहीं है. आज जो सही है, कल वही गलत.इस अनिश्चितता को ही ट्रम्प हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं. अगर विरोधी आपकी अगली चाल न पढ़ सके तो वो हमेशा बचाव में रहेगा. इसका असर सीधा बाजारों पर पड़ता है. अप्रैल 2025 में टैरिफ ऐलान पर अमेरिकी शेयर बाजार में 1 दिन में 2 ट्रिलियन डॉलर यानी ₹1,93,00,000 करोड़ डूब गए. अक्टूबर 2025 में चीन पर टैरिफ पोस्ट से फिर उतना ही नुकसान. 2 ट्रिलियन डॉलर दुनिया के 11 देशों की GDP से ज्यादा है.पहले कार्यकाल में वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ट्रम्प ने 30,573 झूठे या भ्रामक दावे किए. ईरान डील को लेकर भी 39 बार 'डील हो गई' कहा. नाटो सहयोगी इटली की PM तक पर टिप्पणी कर दी. अब ईरान- अमेरिका तनाव खतरनाक मोड़ पर है. ट्रम्प ने चेताया कि अगर ईरान बातचीत पर नहीं आया तो सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर उड़ा देंगे. जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन, जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को टारगेट किया और 7 कमर्शियल जहाजों पर हमले का दावा किया.ट्रम्प की फितरत है - हमेशा सुर्खियों में रहना. वो फैसले नहीं, इवेंट बनाते हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या सुपर पावर की सनक और अनिश्चितता से दुनिया लंबे समय तक चल सकती है? या यही अनिश्चितता एक दिन सबसे बड़ा संकट बन जाएगी.