आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया

महंगाई की मार कुछ यूं हो गई है कि आमदनी से ज्यादा खर्चा होने लगा है। यानि आम आदमी को अब जरूरतों से समझौता करना पड़ रहा है।

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