संसद में एक बार फिर नियम 353 को लेकर तीखी बहस देखने को मिली. सदन में हंगामे के बीच अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि नियम 353 के तहत किसी भी सदस्य द्वारा किसी व्यक्ति के खिलाफ मानहानि से जुड़े आरोप तब तक नहीं लगाया जा सकता, जब तक अध्यक्ष और संबंधित मंत्री को पर्याप्त अग्रिम सूचना न दी गई हो. इसी मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच बहस हुई. एक सदस्य ने कहा कि उन्होंने जो बात नेहरू जी के बारे में कही है, उस पर वे कायम हैं. उन्होंने कहा कि वे उस किताब को ऑथेंटिकेट करके सदन में देंगे और दोहराया "I am again repeating, I am authenticating that work". वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के सदस्य ने कहा कि उनके द्वारा इंदिरा गांधी जी को लेकर कही गई बात अभी भी रिकॉर्ड में है और उसे हटाया नहीं गया है.
इस बीच स्पीकर ओम बिरला ने कहा, "मैं जब आसन पर होता हूं जो मैं व्यवस्था देता हूं, चाहे सत्ता पक्ष हो या प्रतिपक्ष हो समान व्यवस्था देता हूं". पूरे घटनाक्रम में नियम 353 की व्याख्या, आरोपों को प्रमाणित करने की मांग और रिकॉर्ड से हटाने न हटाने को लेकर बहस तेज रही. अध्यक्ष ने सदस्यों से नियमों का पालन करने और तथ्यों को प्रमाण के साथ रखने की अपील की. सदन में माहौल गर्म रहा, लेकिन अध्यक्ष ने व्यवस्था बनाए रखने की बात दोहराई.