अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी और वित्तीय गड़बड़ी मामले में एक बेहद बड़ा और राजनीतिक रूप से संवेदनशील अपडेट सामने आया है. विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी गई है. सूत्रों के अनुसार, शासन को सौंपी गई सिट की फाइनल रिपोर्ट के ड्राफ्ट में वित्तीय गड़बड़ियों, विवादित जमीन खरीद और नियुक्तियों से जुड़े कॉलम में इन दोनों ही वरिष्ठ पदाधिकारियों का नाम शामिल नहीं है.
इस मामले की शुरुआत में ट्रस्ट की मांग पर ही उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में तीन सदस्यीय विशेष जांच आयोग का गठन किया था. प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर पहले ही 8 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है. सिट की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, गड़बड़ियों का दायरा केवल इन्हीं 8 आरोपियों तक ही सीमित पाया गया है. चंपत राय पर स्थानीय स्तर पर भी यह माना जा रहा था कि उन्होंने कुछ गलत लोगों पर भरोसा किया, जिसके कारण यह धोखा हुआ, लेकिन सीधे तौर पर उनकी कोई संलिप्तता नहीं थी.
अब इस रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए पूरी तरह से ट्रस्ट को सौंप दिया गया है. हालांकि, चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिलने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया उबाल आना तय माना जा रहा है. आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी (सपा), लगातार 'चंदा चोरी' के मुद्दे को लेकर हमलावर है. विपक्ष का आरोप है कि 'छोटी मछलियों' को फंसाकर सरकार 'बड़ी मछलियों' को बचाने की कोशिश कर रही है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस मुद्दे को लगातार चुनावी रैलियों में उठा रहे हैं, जिससे साफ है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाएगा.