Lucknow Malihabad Dispute: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पास स्थित मलिहाबाद क्षेत्र में एक ऐतिहासिक स्थल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. इलाके के काकोरी-मलिहाबाद बेल्ट में स्थित एक जगह, जिसे वर्तमान में मस्जिद और कब्रिस्तान के रूप में जाना जाता है, उसे लेकर पासी समाज ने बड़ा दावा किया है.
पासी समाज का कहना है कि यह स्थल दरअसल 11वीं सदी के नागवंशी शासक राजा कंस का किला था और यहां प्राचीन काल से भगवान महादेव की पूजा होती थी. समाज ने आरोप लगाया है कि उनकी ऐतिहासिक विरासत को गलत तरीके से बदलकर उस पर कब्जा कर लिया गया है.
पासी समाज का दावा क्या है?
पासी समाज के प्रतिनिधियों के मुताबिक, मलिहाबाद के ‘का मंडी’ क्षेत्र में मौजूद यह संरचना किसी समय राजा कंस के किले का हिस्सा थी. उनका कहना है कि:
यह स्थान 11वीं सदी का ऐतिहासिक किला है.
किले के भीतर महादेव मंदिर हुआ करता था.
मौजूदा मस्जिद और कब्रिस्तान उसी विरासत को बदलकर बनाए गए हैं.
इतिहास और स्थानीय परंपराएं उनके दावे को समर्थन देती हैं.
समाज ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है.
इतिहास और गजेटियर का हवाला
पासी समाज का दावा है कि लखनऊ के पुराने गजेटियर में भी इस बात का जिक्र मिलता है कि काकोरी और मलिहाबाद का इलाका 11वीं सदी में राजपासी राजा कंस के प्रभाव में था.
इतिहास के अनुसार, जब विदेशी आक्रांता सालार मसूद गाजी इस क्षेत्र में आया, तब राजा कंस ने उसका कड़ा मुकाबला किया था. कथित तौर पर इसी इलाके में उसके दो सेनापतियों को युद्ध में मार गिराया गया था. स्थानीय लोगों के मुताबिक, राजा कंस को एक वीर योद्धा के रूप में जाना जाता है और आज भी उन्हें कई जगहों पर सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किया जाता है.
विवाद क्यों बढ़ा?
पासी समाज का आरोप है कि इस ऐतिहासिक स्थल की असली पहचान को बदलने की कोशिश की गई है. उनका कहना है कि जिस जगह को वे अपनी विरासत और धार्मिक स्थल बताते हैं, उसे कब्रिस्तान और मस्जिद के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है.
वहीं, इस दावे के बाद इलाके में तनाव की स्थिति भी बनी हुई है और प्रशासन भी मामले पर नजर बनाए हुए है.
प्रशासन की भूमिका
हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान नहीं आया है, लेकिन मामला संवेदनशील होने के चलते स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है. सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे विवाद की ऐतिहासिक और कानूनी जांच की मांग भी की जा रही है.