Women Hijab reality in Iran: ईरान को लेकर दुनिया भर में अलग‑अलग तरह की छवियां मौजूद हैं. अक्सर यह कहा जाता है कि ईरान में महिलाओं पर सख्त पाबंदियां हैं और उन्हें ज़बरदस्ती हिजाब या चेहरा ढकने के लिए मजबूर किया जाता है. लेकिन ज़मीन पर तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है.
ईरान की सड़कों, बाज़ारों और सार्वजनिक जगहों पर एक आम समाज की झलक देखने को मिलती है. ठीक वैसे ही जैसे भारत में महिलाएं अपनी पसंद के कपड़ों में बाहर निकलती हैं. यहां भी कई महिलाएं खुले तौर पर आती‑जाती दिखती हैं. हमने मौके पर मौजूद महिलाओं से बात करने की कोशिश की, जिनमें से एक महिला कैमरे पर बात करने के लिए तैयार हुईं.
उनका कहना है कि परिवारों के भीतर अलग‑अलग सोच और पसंद होना आम बात है. एक ही परिवार में माता‑पिता, भाई‑बहन या यहां तक कि दो बहनों की सोच और पहनावा भी अलग हो सकता है. खास राजनीतिक या सामाजिक मौकों पर लोग अपनी मर्ज़ी से तय करते हैं कि वे क्या पहनना चाहते हैं.
महिला ने साफ़ कहा कि उन्हें कभी भी उनकी इच्छा के खिलाफ हिजाब पहनने के लिए मजबूर नहीं किया गया. यह पूरी तरह व्यक्तिगत पसंद का मामला है. अगर कोई महिला हिजाब पहनना चाहती है, तो वह पहनती है और अगर नहीं पहनना चाहती, तो यह भी उसका अधिकार है.
ईरान में रहकर यह अहसास होता है कि पश्चिमी मीडिया में ईरानी महिलाओं को लेकर जो तस्वीर पेश की जाती है, वह ज़मीनी हकीकत से काफी अलग हो सकती है. हमने ईरान के बाज़ारों और अलग‑अलग इलाकों में देखा कि महिलाएं पारंपरिक परिधान के साथ‑साथ आधुनिक और पश्चिमी कपड़ों में भी नज़र आती हैं.
जब भी ईरानी महिलाओं के अधिकार, पहचान और आज़ादी की बात होती है, तो अक्सर एक ही तरह की कहानी सामने आती है. लेकिन ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान सामने आई तस्वीर कहीं ज़्यादा विविध और जटिल है, जहां पसंद, सोच और अभिव्यक्ति के कई रंग मौजूद हैं.