NIA chargesheet Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने बड़ा खुलासा किया है. करीब 7500 पन्नों की चार्जशीट में एजेंसी ने हमले की पूरी साजिश, आतंकियों की पहचान और उनके पाकिस्तान कनेक्शन का विस्तार से जिक्र किया है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस हमले को अंजाम देने वाले तीनों आतंकियों की तस्वीरें भी पहली बार सामने आई हैं. ये तस्वीरें एनआईए ने अपनी चार्जशीट में शामिल की हैं, जो अब सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गई हैं.
कौन थे पहलगाम हमले के आतंकी?
NIA के अनुसार, हमले को अंजाम देने वाले तीनों आतंकी:
फैजल जट उर्फ सुलेमान
हबीब ताहिर उर्फ छोटू
हमजा अफगानी
ये तीनों आतंकी पाकिस्तान से जुड़े हुए थे और लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे. एजेंसी के मुताबिक, ये ‘A कैटेगरी’ के प्रशिक्षित आतंकी थे.
इन तीनों को बाद में ऑपरेशन महादेव के तहत सुरक्षा बलों ने ढेर कर दिया था.
पाकिस्तान से हो रहा था कंट्रोल
चार्जशीट में बड़ा खुलासा यह भी है कि इस हमले को पाकिस्तान में बैठे आतंकी सरगना साजिद भट्ट कंट्रोल कर रहा था. वह लाहौर से लगातार आतंकियों को निर्देश दे रहा था.
इससे साफ होता है कि हमला पूरी तरह से पूर्व नियोजित और अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश का हिस्सा था.
हमले की पूरी प्लानिंग
NIA ने अपने दस्तावेज में बताया कि:
आतंकियों ने 21 अप्रैल की रात जंगलों के रास्ते ट्रैकिंग की.
मुख्य टूरिस्ट रूट से बचते हुए गुप्त रास्ते चुने.
कई किलोमीटर पैदल चलकर बेसरन घाटी पहुंचे.
रातभर घात लगाकर सही समय का इंतजार किया.
सुबह ज्यादा पर्यटक आने पर हमला किया.
हमले में 26 लोगों की मौत हुई, जिनमें 25 भारतीय और 1 विदेशी पर्यटक शामिल था.
लोकल मदद से हुआ हमला
जांच में यह भी सामने आया कि दो स्थानीय लोगों:
परवेज अहमद
बशीर अहमद
ने आतंकियों की मदद की थी. दोनों ने:
आतंकियों को अपनी झोपड़ी में ठहराया.
उनकी गतिविधियों की जानकारी छिपाई.
बताया जा रहा है कि उन्हें बदले में महज ₹3000 दिए गए थे.
भारी तबाही के सबूत
घटना स्थल से NIA को 47 कारतूस मिले. AK-47 और M4 कार्बाइन के इस्तेमाल के सबूत. हमले की पूरी मैपिंग और रूट ट्रैक. चार्जशीट में घाटी का पूरा मैप भी दिया गया है, जिसमें बताया गया कि आतंकियों ने किस दिशा से प्रवेश किया और किस रास्ते से बाहर निकले.
बड़ा सवाल और सख्त संदेश
इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने साफ कर दिया है कि:
हर आतंकी नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई होगी.
स्थानीय सहयोगियों को भी बख्शा नहीं जाएगा.
यह मामला अब सिर्फ आतंकवादी हमले से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकल नेटवर्क के खतरे का बड़ा उदाहरण बन चुका है.