भारतीय स्प्रिंटर गुरिंदरवीर सिंह के साथ इस खास बातचीत में जानिए उनके संघर्ष, मेहनत और रिकॉर्ड तक पहुँचने की पूरी कहानी. 100 मीटर में 10.09 सेकंड का शानदार समय निकालने वाले गुरिंदरवीर बताते हैं कि कैसे लोग आज भी उनके टाइम को गलत बोलते हैं, और क्यों यह उनके लिए मायने रखता है. इस इंटरव्यू में वो खुलकर बात करते हैं अपने शुरुआती संघर्षों पर जब ₹160 तक का खाना भी मुश्किल होता था, फ्लाइट के पैसे नहीं थे, और ज़िंदगी में कई चुनौतियां थीं. अब पूरा फोकस सिर्फ ट्रेनिंग और परफॉर्मेंस पर है. गुरिंदरवीर अपने रेस के हर पहलू को समझाते हैं स्टार्ट से लेकर टॉप गियर तक, और बताते हैं कि कैसे छोटी-छोटी गलतियां भी टाइमिंग को प्रभावित करती हैं. वो मानते हैं कि अगर कुछ फैक्टर्स सही होते, तो उनका टाइम और बेहतर हो सकता था, लेकिन अब उनका फोकस भविष्य पर है. साथ ही वो भारतीय एथलेटिक्स के भविष्य पर भी बड़ी बात कहते हैं, क्या भारत 2028 या 2032 ओलंपिक्स में स्प्रिंट फाइनल तक पहुंचेगा? क्या 10 सेकंड का बैरियर टूटेगा? गुरिंदरवीर का जवाब बेहद पॉजिटिव और आत्मविश्वास से भरा है.