40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते नौकरी सिर्फ एक सैलरी नहीं रह जाती, बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारियों का सहारा व जरिया बन जाती है. बच्चों की पढ़ाई, घर की EMI, बुजुर्ग माता-पिता की सेहत और हर महीने के बढ़ते खर्च के बीच अगर अचानक नौकरी चली जाए, तो क्या होगा? यह सवाल आज कई नौकरीपेशा लोगों के मन में कभी न कभी जरूर आता है. यही वजह है कि इस उम्र में नौकरी जाने का डर कई बार मानसिक तनाव की बड़ी वजह बन जाता है. अच्छी बात यह है कि इस डर में जीने के बजाय कुछ ऐसी तैयारियां की जा सकती हैं, जो मुश्किल समय में आपका आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद कर सकती हैं.
सबसे पहले इमरजेंसी फंड तैयार करें
अगर आपकी पूरी जिंदगी सिर्फ अगले महीने आने वाली सैलरी पर टिकी है, तो नौकरी जाने का डर ज्यादा परेशान कर सकता है. इसलिए सबसे पहले कोशिश करें कि कम से कम 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड तैयार हो. इसमें घर का खर्च, EMI, बच्चों की फीस और दूसरी जरूरी जरूरतों का हिसाब जरूर शामिल करें. इससे मुश्किल समय में फैसले लेने के लिए थोड़ा वक्त मिल जाता है.
नई चीजें सीखना कभी बंद न करें
आज का जॉब मार्केट तेजी से बदल रहा है. नई टेक्नोलॉजी, AI और काम करने के तरीके लगातार बदल रहे हैं. ऐसे में 40 की उम्र यह सोचने की नहीं कि अब सब सीख लिया, बल्कि खुद को लगातार अपडेट रखने की है. अपनी फील्ड से जुड़ी नई स्किल्स सीखने से नए अवसर तलाशना आसान हो सकता है और कॉन्फिडेंस भी बना रहता है.
सिर्फ एक सैलरी पर पूरी तरह निर्भर न रहें
अगर संभव हो, तो कमाई का एक दूसरा रास्ता भी तैयार करने की कोशिश करें. यह कोई बड़ा बिजनेस ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है. फ्रीलांसिंग, कंसल्टिंग, ऑनलाइन काम, टीचिंग या अपनी किसी स्किल से होने वाली अतिरिक्त कमाई भी मुश्किल समय में सहारा बन सकती है. इससे यह भरोसा भी रहता है कि जरूरत पड़ने पर आपके पास एक और विकल्प मौजूद है.
अपने प्रोफेशनल नेटवर्क को मजबूत रखें
कई लोग एक ही कंपनी में सालों काम करने के बाद पुराने कलीग्स और इंडस्ट्री के लोगों से संपर्क कम कर देते हैं. लेकिन मजबूत प्रोफेशनल नेटवर्क कई बार नई नौकरी या नए मौके तक पहुंचने में मदद कर सकता है. इसलिए पुराने साथियों के संपर्क में रहें और प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म्स पर भी अपनी मौजूदगी बनाए रखें.
अपनी सेहत और हेल्थ इंश्योरेंस को नजरअंदाज न करें
नौकरी जाने पर सिर्फ सैलरी ही नहीं रुकती, कई बार कंपनी की तरफ से मिलने वाला मेडिकल कवर भी खत्म हो जाता है. इसलिए अपना पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस पहले से लेकर रखना समझदारी हो सकती है. साथ ही तनाव कम करने के लिए अच्छी नींद, नियमित एक्सरसाइज और संतुलित लाइफस्टाइल भी उतनी ही जरूरी है. जब शरीर और दिमाग दोनों साथ देते हैं, तो मुश्किल हालात का सामना करना भी आसान हो जाता है.
डर नहीं, तैयारी ज्यादा जरूरी है
नौकरी का हमेशा रहना या न रहना हमारे कंट्रोल में नहीं होता, लेकिन उसकी तैयारी जरूर हो सकती है. अगर आपके पास बचत है, नई स्किल्स हैं, अच्छे प्रोफेशनल रिश्ते हैं और जरूरत पड़ने पर कमाई का दूसरा रास्ता भी है, तो नौकरी जाने का डर काफी हद तक कम हो सकता है. इसलिए कल की चिंता में आज का सुकून खोने की बजाय खुद को हर परिस्थिति के लिए तैयार करना ज्यादा समझदारी है.
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