टीवी पर ठहाके लगाती, जज की कुर्सी पर मस्ती करती और हमेशा मुस्कुराती नजर आने वाली अर्चना पुरन सिंह और परमीत सेठी की जोड़ी सालों से ‘परफेक्ट कपल' मानी जाती रही है. 34 साल का साथ, दोस्ती जैसा रिश्ता और हर इंटरव्यू में हंसी मजाक, लेकिन हर चमकती तस्वीर के पीछे कुछ अनकहे साए भी होते हैं. इस खुशहाल दिखने वाली शादी के पीछे भी ऐसे कई पल छुपे थे जिनके बारे में किसी ने कभी सोचा भी नहीं था. हाल ही में दोनों ने अपनी जिंदगी के उस मुश्किल दौर का जिक्र किया है जिसने रिश्ते और पैरेंटिंग दोनों की असली परीक्षा ले ली थी.
जब प्रेग्नेंसी बनी सबसे बड़ा इम्तिहान
अर्चना ने बताया कि पहली प्रेग्नेंसी के दौरान उनकी तबीयत काफी खराब रहती थी. रात-रात भर जागना, बच्चे को संभालना और घर की जिम्मेदारियां निभाना सब कुछ अकेले करना पड़ता था. उन्हें लगता था कि ये सफर दो लोगों का है, लेकिन साथ कोई नहीं है. परमीत उस समय काम और शूटिंग में इतने बिजी थे कि वो ज्यादा वक्त घर पर नहीं दे पाते थे. यहां तक की कई बार तो वो फुटबॉल खेलने तक चले जाते थे.
परमीत का सीधा कबूलनामा
परमीत सेठी ने बिना घुमाए फटाफट मान लिया कि वो शुरुआती सालों में एक एब्सेंट फादर थे. उन्होंने कहा कि उन्हें अंदाजा ही नहीं था कि बच्चा होने के बाद जिंदगी कितनी बदल जाती है. पहले दो से तीन सालों तक वो बेटे के लिए मौजूद नहीं रहे. उन्होंने यहां तक कहा कि उन्होंने बहुत कम बार डायपर बदला और जिम्मेदारियां समझने में देर कर दी.
मां और नानी ने संभाला
अर्चना ने शेयर किया कि बेटे आर्यमान को असल में उन्होंने और उनकी मां ने मिलकर पाला. वो रात में कई बार उठती थीं, लेकिन परमीत अक्सर कहते थे कि वो क्या मदद करें. इस बात से अर्चना को गहरा अकेलापन महसूस होता था. दूसरी प्रेग्नेंसी के दौरान परमीत को एहसास हुआ कि बेटा उनसे दूर हो रहा है. तभी उन्होंने खुद को बदला, समय देना शुरू किया और धीरे-धीरे एक जिम्मेदार पिता बने. आज दोनों अपनी कहानी इसलिए बता रहे हैं ताकि लोग समझें कि परिवार में साथ होना सबसे जरूरी है.
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