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जानें क्या है एंटीबॉडी और ये कैसे कोविड-19 से लड़ने में मदद करते हैं

कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए कई तरह के टेस्ट उपलब्ध हैं जिनमें रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन-पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन, ट्रूनाट टेस्ट,कार्ट्रिज बेस्ड न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट और रैपिड एंटीजन टेस्ट शामिल हैं. इन सभी टेस्ट के जरिए कोविड-19 संक्रमण का पता लगाया जाता है. वहीं रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट का इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि कितने लोग SARS-CoV-2 वायरस से संक्रमित हुए और ठीक हो चुके हैं. लेकिन ऐसे में ये जानना भी बेहद जरूरी है कि एंटीबॉडी क्या है और ये कैसे कोविड-19 से लड़ने में मदद करते हैं.

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  • जानें क्या है एंटीबॉडी और ये कैसे कोविड-19 से लड़ने में मदद करते हैं
    एंटीबॉडी क्या है? एंटीबॉडी शरीर का वो तत्व है, जिसका निर्माण हमारा इम्यून सिस्टम शरीर में वायरस को बेअसर करने के लिए पैदा करता है. संक्रमण के बाद एंटीबॉडीज बनने में कई बार एक हफ्ते तक का वक्त लग सकता है, इसलिए अगर इससे पहले एंटीबॉडी टेस्ट किए जाएं तो सही जानकारी नहीं मिल पाती है. एंटीबॉडी दो प्रकार के होते हैं. पहला एंटीबॉडी हैं - आईजीएम (इम्यूनोग्लोबुलिन एम) और आईजीजी (इम्यूनोग्लोबुलिन जी).
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    दो प्रकार के एंटीबॉडी में क्या अंतर है? आईजीएम एंटीबॉडी: आईजीएम एंटीबॉडी किसी भी संक्रमण के लिए शरीर की प्रारंभिक प्रतिक्रिया हैं और वे संक्रमण के प्रारंभिक चरण में विकसित होते हैं. आमतौर पर, कोविड​​-19 संक्रमण के मामले में, आईजीएम वायरस पहले हफ्ते में पॉजिटीव होते हैं और छह सप्ताह के भीतर खत्म हो जाते हैं. बेंगलुरु के अपोलो हॉस्पिटल्स में पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन के प्रमुख डॉ. रविंद्र मेहता ने कहा, "आईजीएम एंटीबॉडी यह बताता है कि व्यक्ति इम्यून फेज में आज चुका है. आईजीजी एंटीबॉडी: आईजीजी एंटीबॉडी में किसी भी संक्रमण का देर से पता चलता है. आईजीजी एंटीबॉडी लंबे समय तक रहता है.
  • जानें क्या है एंटीबॉडी और ये कैसे कोविड-19 से लड़ने में मदद करते हैं
    एंटीबॉडी का पता कैसे लगाया जाता है? कोरोना की जांच के लिए एक और टेस्ट एंटीबॉडी टेस्ट है. एंटीबॉडी टेस्ट खून का सैंपल लेकर किया जाता है इसलिए इसे सीरोलॉजिकल टेस्ट भी कहते हैं. इसके नतीजे जल्द आते हैं और ये RT-PCR के मुकाबले कम खर्चीला भी होता है. इस टेस्ट की कीमत 500 रूपये होती है.
  • जानें क्या है एंटीबॉडी और ये कैसे कोविड-19 से लड़ने में मदद करते हैं
    एंटीबॉडी के फायदे और नुकसान? एंटीबॉडी टेस्ट बहुत आसान है. इसके नतीजे जल्द आते हैं और ये कम खर्चीला भी होता है. इस टेस्ट के जरिए ये पता लागया जा सकता है कि व्यक्ति कोरोना वायस से संक्रमित हुआ है या नहीं. एंटीबॉडी टेस्ट में कई कोरोना संक्रमण का सटीक पता नहीं लग पाता है. वसंत कुंज के फोर्टिस अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. मुग्धा तापड़िया के अनुसार, एंटीबॉडी परीक्षण की संवेदनशीलता दर 60 प्रतिशत से 70 प्रतिशत है.
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    प्लाज्मा थेरेपी में एंटीबॉडी की भूमिका क्या है? कोरोनावायरस से पीड़ित जो लोग अब पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं उनके ब्लड में जो एंटीबॉडीज बन जाती हैं उन्हें ही प्लाजमा कहते हैं. जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के निदेशक चिकित्सा अनुसंधान डॉ. राजेश पारिख के अनुसार, 98 प्रतिशत से अधिक मरीजों में एंटीबॉडी विकसित होती हैं. हालांकि, प्लाज्मा थेरेपी शुरू करने से पहले, एंटीबॉडी परीक्षण की आवश्यकता होती है.
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