Chhattisgarh News: बस्तर के अंदरूनी गांवों में शिक्षा की अलख जगाने वाले शिक्षादूत माओवादियों के निशाने पर हैं. 3 दिन में माओवादियों ने 2 शिक्षादूतों की हत्या कर दी है. कई शिक्षादूतों को धमकियां दी गई हैं. माओवादियों की इस हरकत ने शिक्षादूतों की चिंता बढ़ा दी है. हाल ही में बीजापुर जिले में अज्ञात लोगों ने सरकारी स्कूलों में अस्थायी अतिथि शिक्षक एक शिक्षादूत की धारदार हथियार से हत्या कर दी. बस्तर में जहां कभी बारूद के धमाके और बंदूकों की तड़तड़ाहट सुनाई देती थी, वहां अब शिक्षा की अलख जग रही है, लेकिन जंगल में आदिवासी बच्चों को उम्मीदों का पहड़ा पढ़ाने वाले शिक्षादूत माओवादियों के निशाने पर हैं.
हलिया घटनाएं, 3 दिन में दो की मौत
29 अगस्त की देर शाम को बीजापुर के गंगालूर क्षेत्र के नेन्द्रा में पदस्थ शिक्षादूत कल्लू ताती की माओवादियों ने बेरहमी से हत्या कर दी. इससे 2 दिन पहले ही 27 अगस्त को सुकमा के मंडीमरका में शिक्षादूत बारसे लक्ष्मण को माओवादियों ने मार दिया.
- सुकमा और बीजापुर में पुनः संचालित स्कूलों में कुल 464 शिक्षादूत नियुक्त किए गए.
- शिक्षादूतों का मासिक मानदेय 12,500 तय है, लेकिन इसे घटाकर 10 हजार रुपए दिया जाता है.
- साल वर्ष 2018 से अब तक लगभग 55 शिक्षादूतों को माओवादियों ने धमकी दी.
- इन स्कूलों में पढ़ा रहे 9 शिक्षादूतों की माओवादियों ने बेरहमी से हत्या कर दी.
- शिक्षादूतों की मांग है कि हत्या करने वाले माओवादी के पुनर्वास नीति बंद की जाए.
- शिक्षादतों को शिक्षक भर्ती (सहायक शिक्षक) में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को मुक्त कर डिप्लोमा कोर्स (DED) के अनुसार प्राथमिकता दिया जाए.
- जिन शिक्षादूतों की माओवादियों ने हत्या की उनके परिवार को आर्थिक मुआवजा 50 लाख और अनुकम्पा नियुक्ति दी जाए.
पुलिस का क्या कहना है?
बस्तर संभाग आईजी पुलिस सुंदरराज पी का कहना है कि "सुरक्षाबल के जवान बस्तर में माओवादियों पर लगातार ऑपरेशन कर रहे हैं, पिछले डेढ़ सालों में 400 से ज्यादा माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं, जिसमें उनके टॉप लीडर भी शामिल हैं, माओवादियों की पुरानी टेक्टिस है कि वो जब बैकफूट पर होते हैं तो ग्रामीणों और आम जनता में दहशत फैलाने के लिए शिक्षा, विकास कार्य में लगे लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं. शिक्षादूत की हत्या भी इसलिए कर रहे हैं, लेकिन इससे आम जनता अब उनके दहशत में नहीं आने वाली, आम जनता का पूरा समर्थन सुरक्षाबलों को है, माओवादियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई जारी है."
शिक्षादूतों का दर्द
शिक्षादूत गंभीर तेलाम कहते हैं कि "हम सलवा जुडूम के दौरान बंद स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, हमारी बहुत सारी समस्या है, नक्सली हमें धमकी देते हैं, हमारे साथियों को मार रहे हैं, शासन-प्रशासन भी हमको लेकर गंभीर नजर नहीं आती है, हमें नियमित करने की मांग की जा रही है, मानदेय को लेकर भी मांग है, लगातार हम लोगों को धमकी मिलती है."
27 अगस्त को सुकमा जिले में नक्सलियों ने एक शिक्षादूत की हत्या कर दी थी. बस्तर क्षेत्र के नारायणपुर जिले में 15 अगस्त को भी एक शिक्षादूत की हत्या की गई थी. वहीं, पिछले महीने बीजापुर जिले के फरसेगढ़ इलाके में नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर होने के शक में दो शिक्षादूतों की हत्या कर दी थी. पड़ोसी जिले दंतेवाड़ा में 19 फरवरी को भी इसी तरह के आरोप में एक शिक्षादूत समेत दो लोगों की हत्या कर दी गई थी. सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में इस वर्ष अब तक माओवादी हिंसा में 30 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
आम जनता की सुरक्षा पर ध्यान दे सरकार : कांग्रेस
छत्तीसगढ़ पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि "सरकार लगातार दावा कर रही है कि बस्तर में माओवादी बैकफुट पर हैं, लेकिन माओवादी लगातार आदिवासी और आम जनता को नुकसान पहुंचा रहे हैं, उन्हें मार रहे हैं, शिक्षादूत की हत्या की सूचना मिली, घटना बहुत दु:खद है, सरकार को वहां आम जनता की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए."
तय समय सीमा में माओवाद समस्या खत्म होगी या नहीं इसका जवाब 31 मार्च 2026 के बाद ही मिलेगा, लेकिन बस्तर में शिक्षादूतों और आम नागरिकों की माओवाद हिंसा में हत्या चिंताजनक है.
माओवादियों की ये कायराना करतूत : BJP
छत्तीसगढ़ बीजेपी अध्यक्ष किरण सिंह देव का कहना है कि "माओवादियों के खिलाफ सरकार लगातार काम कर ही है, बस्तर में विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, शिक्षादूत की हत्या की जानकारी मिली, बहुत दु:खद है, माओवादियों की ये कायराना करतूत है, लेकिन सरकार जिस तरह से काम कर रही है बस्तर जल्द ही शांति का टापू बनेगा."
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