एक ही कमरे में 95 बच्चे, 5 ब्लैकबोर्ड ! सवाल- सतना में ऐसे कैसे पढ़ पाते हैं बच्चे?

शिक्षा का अधिकार कानून तो कहता है हर बच्चे को मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन मध्यप्रदेश के स्कूलों का हाल बेहाल है. सतना जिले के उचेहरा विकासखंड में एक सरकारी स्कूल ऐसा है जहां कक्षा एक से लेकर पांच तक के बच्चे एक ही कमरे में साथ पढ़ते हैं. इन्हें अलग-अलग शिक्षक अलग-अलग विषय पढ़ाते हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

Satna condition of schools: शिक्षा का अधिकार कानून तो कहता है हर बच्चे को मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन मध्यप्रदेश के स्कूलों का हाल देखकर लगता है मानो यह कोई व्यंग्य संग्रह हो ... जहाँ बच्चे पढ़ते कम हैं, और व्यवस्था पर हंसी ज़्यादा आती है. राजधानी भोपाल से लेकर जिलों तक कहानी वही है. एक कमरा, पांच क्लास, पांच ब्लैकबोर्ड और शोर का ऐसा संगम... जैसे सरकार ने स्कूल नहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रम खोल रखा हो. एक कमरे में 5 ब्लैकबोर्ड ... अलग-अलग शिक्षक, अलग-अलग विषय पढ़ाते हैं, लेकिन एक ही कमरे में ... आप सोचेंगे ये कोई कला है लेकिन ऐसा नहीं है ये इनकी मजबूरी है.

ये कहानी है सतना जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर उचेहरा विकासखंड की. यहां मौजूद है डुड़हा प्राथमिक विद्यालय. यहां भवन टूटा तो बच्चों को एक ही हॉल में ठूंस दिया गया. कोई एक कोने में A-B-C-D सिखा रहा है, तो दूसरा कोने में ‘अ आ इ ई'. जैसे शिक्षा विभाग ने सोचा हो ...जब एक टीवी पर पांच चैनल चल सकते हैं, तो एक कमरे में पाँच क्लास क्यों नहीं? क्या है ये पूरा मामला जानने से पहले ये समझ लीजिए कि राज्य में शिक्षा की स्थिति क्या है?

दरअसल डुड़हा प्राथमिक विद्यालय.के पास पूरा भवन था लेकिन उसके टूट जाने के बाद से न ही वैकल्पिक इंतजाम हए और न ही मरम्मत ही हुई. नतीजा ये हुआ कि यहां मौजूद 95 बच्चों को एक ही क्लास में बैठाया जा रहा है.  कभी पेड़ के नीचे क्लास लगती है, तो कभी बरसात में बच्चों को अंदर खिसका दिया जाता है. मशहूर व्यंगकार हरिशंकर परसाई ने एक बार कहा था- हमारे यहाँ सबसे बड़ी योग्यता अभाव को आदत बना लेना है. कुछ ऐसी ही योग्यता इस स्कूल के शिक्षकों के साथ बच्चों ने भी हासिल कर ली है. अब यहां पांच क्लास एक ही साथ एक ही कमरे में लगती है और आपसी शोर के बीच ही पढ़ाई होती है. देखा जाए तो डुडहा अकेला नहीं है, सतना जिले में ऐसे सत्तर से ज़्यादा स्कूल मौजूद हैं. डूडहा के हेडमास्टर बताते हैं कि भवन को लेकर फाइलें सरकार के पास लंबित है जल्द ही कुछ फैसला हो सकता है. हम कम संसाधन में ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं.

स्कूलों की ऐसी स्थिति पर जब हमने राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से सवाल किया तो उन्होंने कहा- मैं इस बात से सहमत हूं कि आंशिक कमी की गुंजाइश रहती है फिर भी हमारा प्रयास है कि बच्चों को बेहतर से बेहतर संसाधन दिला सकें. शिक्षा मंत्री ने बताया- मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में हमने स्कूलों के मेंटेनेंस और स्कूलों के नए निर्माण के लिए अतिरिक्त कक्षों के लिए तैयारी की है. वित्त विभाग से स्वीकृति मिलते ही हमें नए क्लासरम बनाएंगे. हमने मेंटनेंस के लिए भी बड़ी राशि दी है. प्रदेश में लाखों की संख्या में बच्चे हैं और हजारों की संख्या में स्कूल...इसलिए थोड़ा वक्त लग रहा है.

ये भी पढ़ें: ड्यूटी से गायब मिली मेडिकल ऑफिसर ऑन द स्पॉट बर्खास्त, कलेक्टर ने प्राचार्य समेत आधा दर्जन का रोका वेतन

Featured Video Of The Day
Voter Adhikar Yatra में शामिल Akhilesh का BJP पर हमला 'अवध से हमने हटाया..अब मगध से भी हटेगी बीजेपी'