Why Train Seats Blue: भारतीय रेलवे से हर दिन करोड़ों लोग सफर करते हैं. चाहे लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेन हो या फिर रोजाना चलने वाली पैसेंजर ट्रेन, एक चीज लगभग हर डिब्बे में समान नजर आती है. सीटों का नीला रंग. शायद आपने भी कई बार ट्रेन में बैठकर यह सोचा हो कि आखिर रेलवे ने सीटों के लिए नीला रंग ही क्यों चुना? क्या यह सिर्फ डिजाइन और दिखावे के लिए है या इसके पीछे कोई खास वजह छिपी हुई है?
असल में भारतीय रेलवे में सीटों का नीला रंग बहुत सोच-समझकर चुना गया है. यह रंग यात्रियों की आंखों को आराम देता है, लंबे सफर में मानसिक शांति महसूस कराता है और सबसे बड़ी बात, धूल-मिट्टी और गंदगी को जल्दी दिखने नहीं देता. भारत जैसे देश में जहां ट्रेनों में हर मौसम और हर तरह की कंडीशन में यात्रा होती है, वहां सीटों का रंग भी काफी मायने रखता है. यही वजह है कि रेलवे ने नीले रंग को सबसे बेहतर विकल्प माना.
ट्रेन की ज्यादातर सीटें नीले रंग की क्यों? | Why Are Most Train Seats Blue?
1. आंखों को देता है आराम
नीला रंग मन को शांत करने वाला माना जाता है. साइकोलॉजिस्ट्स के अनुसार यह रंग तनाव कम करने और दिमाग को रिलैक्स महसूस कराने में मदद करता है. ट्रेन का सफर कई बार घंटों या दिनों का होता है, ऐसे में अगर सीटों का रंग बहुत चमकीला या तेज हो तो यात्रियों को बेचैनी महसूस हो सकती है. नीला रंग आंखों को सुकून देता है, इसलिए लंबे सफर में लोग ज्यादा सहज महसूस करते हैं.
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2. गंदगी जल्दी नजर नहीं आती
भारतीय ट्रेनों में हर दिन लाखों यात्री सफर करते हैं. ऐसे में सीटों पर धूल, मिट्टी और दाग लगना आम बात है. अगर सीटों का रंग सफेद, क्रीम या कोई हल्का रंग होता तो वे बहुत जल्दी गंदी दिखने लगतीं. नीला रंग गंदगी को काफी हद तक छिपा लेता है, जिससे डिब्बे लंबे समय तक साफ-सुथरे नजर आते हैं.

3. धूप और मौसम का असर कम पड़ता है
भारत में कई जगह तेज धूप और गर्मी रहती है. हल्के रंग जल्दी फीके पड़ जाते हैं, जबकि नीला रंग लंबे समय तक अपनी चमक बनाए रखता है. यही वजह है कि रेलवे के लिए यह रंग ज्यादा टिकाऊ और कम मेंटेनेंस वाला साबित होता है.
4. मानसिक रूप से भी करता है शांत
एक्सपर्ट्स के अनुसार नीला रंग यात्रियों को मानसिक रूप से भी शांत महसूस कराता है. भीड़भाड़ और लंबे सफर के दौरान यह रंग तनाव को थोड़ा कम करने में मदद करता है. यही कारण है कि कई एयरलाइंस और सार्वजनिक जगहों पर भी नीले रंग का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है.
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सिर्फ सीट ही नहीं, पूरी सोच है
भारतीय रेलवे में चीजों का चयन केवल दिखावे के आधार पर नहीं किया जाता. सीटों का रंग भी यात्रियों की सुविधा, सफाई और रखरखाव को ध्यान में रखकर चुना गया है. यानी अगली बार जब आप ट्रेन में नीली सीट पर बैठें, तो समझ जाइए कि इसके पीछे सिर्फ रंग नहीं बल्कि एक पूरी वैज्ञानिक और व्यावहारिक सोच काम करती है.
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