हम सभी अपने शरीर को बहुत हल्के में लेते हैं. जब तक सब कुछ सही चलता रहता है, हम सोचते हैं कि हम बिल्कुल फिट हैं और हमें कुछ नहीं हो सकता. लेकिन, सच्चाई यह है कि शरीर धीरे-धीरे हमें संकेत देता रहता है, बस हम उन्हें नजरअंदाज करते रहते हैं. मेरी कहानी भी कुछ ऐसी ही है. मैं अपने आप को हमेशा फिट मानता था, लेकिन मेरी रोज की आदतें बिल्कुल गलत थीं. खराब डाइट रूटीन, कम नींद, पानी की कमी ये सब मेरे जीवन का हिस्सा बन चुके थे. शुरुआत में सब सामान्य लगा, लेकिन जब शरीर ने जवाब देना शुरू किया, तब जाकर मुझे अपनी गलतियों का एहसास हुआ.
जब आदतें बन गईं सबसे बड़ी गलती
मेरा रूटीन ऐसा था जिसे देखकर कोई भी कहेगा कि यह लंबे समय तक नहीं चल सकता. देर रात तक जागना, सुबह देर से उठना, कभी टाइम पर खाना, दिनभर बहुत कम पानी पीना, कई बार घंटों भूखे रहना. शुरुआत में मुझे लगा कि ये सब सामान्य है. क्योंकि मुझे कोई बड़ी दिक्कत महसूस नहीं हो रही थी. लेकिन, असल में मेरा शरीर अंदर ही अंदर कमजोर हो रहा था.
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धीरे-धीरे दिखने लगे संकेत
कुछ समय बाद मुझे हल्की-हल्की परेशानी होने लगी. शरीर में कमजोरी, पेट में दर्द, थकान जो आराम करने के बाद भी खत्म नहीं होती थी. मैंने शुरुआत में इसे नजरअंदाज किया और दवाइयों का सहारा लिया. कुछ दिन ठीक लगा, लेकिन फिर वही समस्या वापस आ जाती थी. यह वो समय था जब मेरा शरीर बार-बार मुझे संकेत दे रहा था कि कुछ गलत हो रहा है.
जब दर्द ज्यादा बढ़ गया, तो मैंने अल्ट्रासाउंड करवाया. रिपोर्ट देखकर मैं हैरान रह गया, दोनों किडनियों में स्टोन. शरीर में कई विटामिन्स की कमी, फैटी लिवर की समस्या. जिसे मैं खुद को फिट समझता था, वह अंदर से पूरी तरह बिगड़ चुका था. उस दिन मुझे समझ आया कि शरीर को नजरअंदाज करना कितनी बड़ी गलती हो सकती है.

सोच में आया बड़ा बदलाव
उस एक रिपोर्ट ने मेरी सोच पूरी तरह बदल दी. अब मैंने तय किया कि समय पर खाना खाऊंगा, रोज पर्याप्त पानी पीऊंगा, नींद पूरी लूंगा (कम से कम 7-8 घंटे), जंक फूड और इरेगुलेरिटी से दूर रहूंगा. धीरे-धीरे जब मैंने अपनी आदतें बदलीं, तो शरीर भी सुधार दिखाने लगा.
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सबसे बड़ा सबक जो मैंने सीखा
इस अनुभव ने मुझे एक बहुत बड़ी सीख दी, शरीर तब तक साथ देता है, जब तक हम उसे संभालते हैं. अगर हम लगातार उसे नजरअंदाज करते हैं, तो एक दिन वह हमें मजबूर कर देता है रुककर सोचने के लिए.
हम अपने काम, पैसे और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने शरीर को सबसे आखिरी प्राथमिकता दे देते हैं. लेकिन सच यह है कि अगर शरीर ही साथ नहीं देगा, तो बाकी सब बेकार है.
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