भजन क्लबिंग (Bhajan Clubbing) एक नया और तेजी से लोकप्रिय हो रहा ट्रेंड है, जिसमें युवा खासकर GenZ पारंपरिक भजनों को आधुनिक नाइट क्लब जैसे माहौल और संगीत के साथ गाते हैं. ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी भजन क्लबिंग का जिक्र किया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपने भारत में 'भजन क्लबिंग' के नए ट्रेंड के बारे में सुना होगा. इसे हमारी Gen Z यानी नई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है. यहां ऑस्ट्रेलिया में भी, मैंने सुना है कि आपके वीकेंड आस्था और आध्यात्मिकता से भरे होते हैं. ऐसे में जानिए भजन क्लबिंग क्या है और इसका ट्रेंड इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है.
पीएम मोदी ने किया जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में भारतीयों को संबोधित करते हुए इस भजन क्लबिंग ट्रेंड का खास तौर पर जिक्र किया. उन्होंने तारीफ की कि कैसे भारत की नई पीढ़ी अपनी जड़ों और आस्था को आधुनिक जीवनशैली के साथ खूबसूरती से जोड़ रही है. इससे पहले जनवरी 2026 में मन की बात कार्यक्रम में भी पीएम मोदी ने इस ट्रेंड की जमकर सराहना की थी.
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भजन क्लबिंग क्या है?
भजन क्लबिंग एक नया ट्रेंड है, जिसमें युवा पारंपरिक भजनों और मंत्रों को आधुनिक संगीत जैसे टेक्नो बीट्स या गिटार की धुन के साथ नाइटक्लब जैसे माहौल में गाते और नाचते हैं. यह 'सोबर-क्यूरियस' यानी बिना शराब-नशे के मौज-मस्ती करते हैं, जहां युवा क्लबिंग की एनर्जी और आध्यात्मिकता दोनों का एक साथ आनंद लेते हैं. भजन क्लबिंग में जो गाने बजते हैं वो इलेक्ट्रो या पॉप लिरिक्स वाले गाने नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे हिंदू भक्ति गीत होते हैं जिन्हें आमतौर पर आपने मंदिरों और धार्मिक कार्यक्रमों में सुना होगा.
क्लब जैसा माहौल- इसमें किसी कॉन्सर्ट या नाइट क्लब की तरह लेजर लाइट्स, दमदार साउंड सिस्टम और म्यूजिकल बीट्स होती हैं.
आधुनिक संगीत- यहां वेस्टर्न या फिल्मी गानों के बजाय प्राचीन मंत्रों और भजनों को इलेक्ट्रॉनिक, टेक्नो या लो-फाई बीट्स के साथ रीमिक्स करके गाया जाता है.
मानसिक शांति- युवा बिना किसी कठोर धार्मिक नियम के सामूहिक रूप से नाचते, गाते हैं और तनाव से मुक्ति पाते हुए ईश्वर की भक्ति में लीन होते हैं.
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