Traditional Indian Piercings: लड़कियों के कान में जब तक सुंदर से झुमके न हो कुछ अधूरा सा लगता है, भारत में कम उम्र में ही कान छिदवा दिए जाते हैं क्योंकि यह सिर्फ फैशन का हिस्सा ही नहीं है, बल्कि कई जगहो पर यह सांस्कृतिक पहचान और परंपरा का प्रतीक भी मानी जाती है. ज्यादातर लोगों को ऐसा लगता है की पियर्सिंग सिर्फ काम या नाक पर करवाई जाती है, लेकिन ऐसा है नहीं. बता दें अलग-अलग राज्यों में पियर्सिंग के अलग-अलग मायने हैं. तो चलिए बिना देरी किए जानते हैं भारत के किस क्षेत्र में कौनसी पियर्सिंग करवाई जाती है.
भारत में कान छिदवाने का महत्व
राजस्थान: अपनी संस्कृति और इतिहास के लिए जाना जाता है, जितना यह अपने खाने को लेकर चर्चा में रहता है, बिल्कुल वैसे ही अपनी बड़ी नथ के लिए भी. राजस्थान में पियर्सिंग का इतिहास बेहद पुराना है. यहां की लड़कियों कान में दो या तीन छेद करवाना और शादीशुदा महिलाओं में नथणी बड़ी नथ पहनना आम है.
महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की महिलाएं पेशवाई नथ के लिए दुनियाभर में महसूर है. अगर बात करें वहां के ग्रामीण इलाकों की तो वहां, 'बुगडी' नाम की गोल आकार वाली कार्टिलेज पियर्सिंग काफी प्रचलित है.
तमिलनाडु: तमिलनाडु में पियर्सिंग सिर्फ फैशन करवाने के लिए ही नहीं कारवाई जाती, बल्कि धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा है. तमिलनाडु में बच्चे के जन्म के बाद कान छिदवाना जरूरी माना जाता है. यहां की महिलाएँ नाक की दोनों तरफ पियर्सिंग करवाती हैं, जिसे सौभाग्य से जोड़ा जाता है.
उत्तर प्रदेश और बिहार: इन राज्यों में नथ को बहु की पहचान माना जाता है. वहीं, यहां की लड़कियां कान के लोब के साथ ऊपरी हिस्से में भी पियर्सिंग करवाती है.
पंजाब: पंजाब में पियर्सिंग ज्यादा भारी-भरकम नहीं होती. यहां की लड़कियां कानों के हल्के झुमके जिन्हें अक्सर एक चेन के माध्यम से बालों में लटकाती हैं पहनना पसंद करती हैं.
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