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बच्‍चे गलत दोस्तों की पहचान कैसे करें? पेरेंटिंग कोच ने सुझाएं क्‍या होते हैं वे संगत के संकेत

Healthy Friendships Tips : 10-12 साल की उम्र में बच्चे दोस्तों से जल्दी प्रभावित होते हैं. ऐसे में उन्हें गलत संगत के संकेत पहचानना सिखाना जरूरी है. जानिए वे 7 रेड फ्लैग्स, जो बच्चों को सुरक्षित, आत्मविश्वासी और सही फैसले लेने में मदद कर सकते हैं.

बच्‍चे गलत दोस्तों की पहचान कैसे करें? पेरेंटिंग कोच ने सुझाएं क्‍या होते हैं वे संगत के संकेत
बच्‍चों को गलत संगत से बचाने के ट‍िप्‍स.

Healthy Friendships Tips : 10 से 12 साल की उम्र वह दौर होता है, जब बच्चे परिवार के साथ-साथ अपने दोस्तों से भी सबसे ज्यादा प्रभावित होने लगते हैं. इस उम्र में उनकी सही और गलत को समझने की समझ विकसित हो रही होती है. इसलिए कई बार वे ऐसे दोस्तों के प्रभाव में आ जाते हैं जो उनकी आदतों, पढ़ाई और व्यवहार पर गलत असर डाल सकते हैं. ऐसे में माता-पिता को बच्चों पर केवल नजर रखने के बजाय उन्हें यह सिखाना चाहिए कि एक अच्छा और बुरा दोस्त कैसे पहचाना जाए. अगर बच्चे इन शुरुआती संकेतों को समझना सीख जाएं, तो वे गलत संगत से बच सकते हैं और आत्मविश्वास के साथ सही फैसले लेना सीख सकते हैं.

घर से बातें छिपाने के लिए कहे तो रहें सतर्क

अगर कोई दोस्त बार-बार कहे कि 'ये बात घर पर मत बताना, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. सच्ची दोस्ती में ऐसी कोई बात नहीं होती जिसे माता-पिता से छिपाने की जरूरत पड़े. बच्चों को समझाएं कि किसी भी दोस्त के कहने पर परिवार से बातें छिपाना सही नहीं है.

गलत कामों को ‘कूल' बताने वाले दोस्त से दूरी बनाएं

अगर कोई दोस्त झूठ बोलने, नियम तोड़ने या किसी का मजाक उड़ाने जैसी गलत आदतों को मजेदार या स्टाइलिश बताता है, तो यह खराब संगत का संकेत हो सकता है. ऐसे व्यवहार को अपनाने के बजाय बच्चों को सही मूल्यों पर टिके रहने की सीख दें.

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Photo Credit: File Photo

इमोशनल प्रेशर दोस्ती नहीं, दबाव है

अगर कोई दोस्त कहे, "अगर तुम मेरे सच्चे दोस्त हो, तो तुम्हें यह करना ही पड़ेगा", तो यह दोस्ती नहीं बल्कि इमोशनल प्रेशर है. अच्छे दोस्त कभी भी किसी को उसकी इच्छा के खिलाफ कोई काम करने के लिए मजबूर नहीं करते.

पढ़ाई का मजाक उड़ाना भी एक चेतावनी है

जो दोस्त मेहनत से पढ़ने वाले बच्चों को "बोरिंग" या "टीचर का चमचा" कहकर नीचा दिखाते हैं, वे अक्सर दूसरों की प्रगति से खुश नहीं होते. सच्चे दोस्त एक-दूसरे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं.

व्यवहार में बदलाव को पहचानें

अगर किसी दोस्त के साथ रहने के बाद बच्चा पहले से ज्यादा झूठ बोलने लगे, गुस्सा करने लगे या नियम तोड़ने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि उसकी संगत सही नहीं है. माता-पिता को ऐसे बदलावों पर ध्यान देना चाहिए.

जो आपकी सीमाओं का सम्मान न करे, वह अच्छा दोस्त नहीं

हर बच्चे की अपनी पसंद, नापसंद और सीमाएं होती हैं. अगर कोई दोस्त बार-बार "ना" कहने के बाद भी दबाव बनाए या निजी सीमाओं का सम्मान न करे, तो यह अच्छी दोस्ती का संकेत नहीं है.

सच्चा दोस्त आपकी सहजता और सुरक्षा को महत्व देता है

गलत दोस्त अक्सर वही काम करने के लिए कहते हैं, जिन्हें करने में बच्चा सहज महसूस नहीं करता. इसके उलट एक अच्छा दोस्त आपकी भावनाओं, फैसलों और सुरक्षा का सम्मान करता है. ऐसी दोस्ती ही बच्चों के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व के विकास में बड़ी भूमिका निभाती है.

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