केरल के फोटोज और वीडियोज जब भी सोशल मीडिया में देखते हैं वो वहां पर जाने का मन हो जाता है. केरल का मानसून तो अपने आप में ही इतना खूबसूरत है कि उसको देखने का सपना कई लोगों का होता है. ऐसा ही सपना था लखनऊ में रहने वाली शैफाली का. शैफाली को घूमने का शौक था और उनकी इस लिस्ट में केरल भी शामिल था.
शैफाली ने बताया कि केरल का मानसून देखने का सपना वो कई सालों से देख रही थीं. जिस जगह को वो सोशल मीडिया पर सालों से देख रही थीं फाइनली उनको वहां जाने का मौका मिल गया था. बारिश में भीगे पड़ाड़, चाय के बागान और बादलों से ढकी वादिया जो शैफाली अब तक सोशल मीडिया पर देखती थीं, उनको अब वो अपनी आंखों से देख पा रही थी. ये सब एक खूबसूरत सपने सा था. लेकिन उनका ये सपना उनके साथ कुछ ऐसा कर गया जिसकी उम्मीद शायद ही उन्होंने कभी की होगी. जिस मौसम में वो जाना चाहती थीं, वहीं मौसम उनके लिए परेशानी बन गया. दरअसल, शैफाली मानसून ब्लूज का शिकार हो गई थीं.

कैसे हुई शुरूआत
शैफाली अपने दोस्तों के साथ केरल पहुंची तो शुरुआत में सब कुछ सपने जैसा लग रहा था. होटल की खिड़की से दिखती बारिश, ठंडी हवाएं और हर तरफ हरियाली आंखों और मन को एक अलग ही सुकून दे रही थीं. लेकिन तीन से चार दिन निकलने के बाद शैफाली का मूड बदलने लगा. वो हर वक्त आलस में रहती और सुबह उठने का मन नहीं करता था.
ना कहीं घूमने जाने का मन करता था, ना किसी से बात करने का और वो बिना किसी वजह के ही उदास रहने लगी थीं. उनके दोस्त और वो खुद भी नहीं समझ पा रही थीं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. हर दिन के साथ उनका ये चिड़चिड़ापन बढ़ने लगा. हर वक्त होती बारिश की वजह से अधिकतर समय होटल के कमरे में ही बीत रहा था. ना तो सूरज दिख रहा था ना धूप. अपनी सपनों की दुनिया में होते हुए भी वो बहुत उदास थी.
इसकी वजह जानने के लिए जब थोड़ा फोन खंगाला और गूगल किया तो पता लगा कि ये कुछ और नहीं बल्कि "मॉनसून ब्लूज" था. जिसके बारे में पहले कभी नहीं सुना था. तब जाकर शैफाली को अपनी उदासी की असल वजह पता लगी.
अगर आपको भी शैफाली की तरह इसके बारे में नहीं पता था, तो चलिए आपको बता दें कि असल में ये मर्ज है क्या, जो अपनी पसंदीदा मौसम और जगह होने पर भी लोगों को उदास कर देता है.

डॉ. साग्निक मुखर्जी
क्या होता है मानसून ब्लूज
एक्सपर्ट की मानें तो कई लोगों पर मौसम का असर सिर्फ उनकी बॉडी पर नहीं बल्कि उनके दिमाग पर और इमोशन्स पर भी पड़ता है. हर वक्त बादलों की धुंध, धूप की कमी, घर में बंद रहना, बाहर कम जाना और हर रोज के कामों में हुए ये बदलाव मूड पर असर डाल सकते हैं. जिसकी वजह से उदासी, थकान, लो एनर्जी, हर वक्त नींद आना, सोने का मन करना और किसी भी काम में मन न लगना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं.
मानसून ब्लूज कोई बड़ी बीमारी नहीं है, लेकिन इसको इग्नोर भी नहीं करना चाहिए. अगर उदासी लंबे समय तक बनीं रहती है और आपकी हर रोज की लाइफ पर असर होने लगे तो किसी एक्सपर्ट से सलाह जरूर लेनी चाहिए.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में भी बदलते मौसम का प्रभाव इंसानी दिमाग पर क्या और कैसे पड़ता है रिसर्च पब्लिश की गई है.
कैसे करता है असर
डॉ. साग्निक मुखर्जी ने अपने एक ब्लॉग में बताया कि आखिर कैसे मौसम आपके मूड को प्रभावित करता है. इसके साथ ही हमारा एनवायरमेंट भी इसमें अहम भूमिका निभाता है. मानसून के समय पानी का जमा होना और वॉटर पॉल्यूशन जैसे अन्य चीजें स्वास्थ्य संबंधी खतरे को भी बढ़ाती हैं. जिससे लोगों पर प्रेशर पड़ता है.
कैसे करें बचाव
- सोने और खाने का समय निश्चित करें.
- नेचुरल रोशनी में रहें.
- घर के अंदर ही एक्सरसाइज करें.
- रहने की जगह को सूखा और हवादार बनाएं.
- ध्यान लगाएं.
- काम के बीच में ब्रेक लें.
डॉ. साग्निक मुखर्जी (MBBS; MD; MIPS; MIAPP)
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