हर साल मानसून के दौरान भारत की प्राकृतिक सुंदरता और भी निखर जाती है. पहाड़ हरी चादर ओढ़ लेते हैं, झरने पूरे वेग से बहने लगते हैं और नदियां बारिश के पानी से लबालब भर जाती हैं. देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होती है, लेकिन पूर्वोत्तर भारत का एक छोटा सा गांव अपनी अनोखी पहचान रखता है. मेघालय की धुंध से ढकी खासी पहाड़ियों में बसा मौसिनराम (Mawsynram) दुनिया में सबसे अधिक बारिश पाने वाला स्थान माना जाता है. मानसून के मौसम में यहां का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है. बादल पहाड़ियों के बीच तैरते नजर आते हैं, ऊंची चट्टानों से झरने गिरते हैं और चारों ओर हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है. अगर आप कभी सोचते हैं कि भारत की "मानसून कैपिटल" किसे कहा जाता है, तो इसका जवाब मौसिनराम है. अपनी रिकॉर्डतोड़ बारिश और मनमोहक प्राकृतिक सौंदर्य के कारण यह जगह पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को बहुत पसंद आता है.
मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले में स्थित मौसिनराम गांव में सबसे ज्यादा बारिश होती है. यही कारण है कि मौसिनराम को भारत की "मानसून कैपिटल" कहा जाता है. मौसिनराम में इतनी ज्यादा बारिश होने का मुख्य कारण इसकी खास भौगोलिक स्थिति है.
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मौसिनराम में इतनी बारिश क्यों होती है?
यह मेघालय की खासी पहाड़ियों में स्थित है. बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी से भरी मानसूनी हवाएं यहां पहुंचती हैं. पहाड़ियां इन हवाओं को ऊपर उठने पर मजबूर करती हैं, जिससे भारी बारिश होती है. जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून यहां बहुत तेज और लगातार बारिश लेकर आता है. इन सभी कारणों से मौसिनराम में हर साल जबरदस्त मानसून देखने को मिलता है. घने बादल, ऊंचे झरने और चारों तरफ फैली हरियाली इस गांव को प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के बीच बेहद खास बनाती है.
चेरापूंजी का भी है खास ऐतिहासिक महत्व
मौसिनराम से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित चेरापूंजी (सोहरा) भी अपनी भारी बारिश के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. एक समय ऐसा था जब चेरापूंजी को दुनिया का सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान माना जाता था. आज भी इसके नाम एक महीने और एक साल में सबसे ज्यादा बारिश होने के रिकॉर्ड दर्ज है. हालांकि, वर्तमान में मौसिनराम को सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा वाला स्थान माना जाता है, लेकिन चेरापूंजी और मौसिनराम दोनों ही मेघालय के सबसे लोकप्रिय मानसून पर्यटन स्थलों में गिने जाते हैं. पर्यटक अक्सर इन दोनों जगहों की यात्रा एक साथ करते हैं.
मौसिनराम के आसपास क्या देखें?
मौसिनराम सिर्फ अपनी रिकॉर्डतोड़ बारिश के लिए ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता और अनोखे पर्यटन स्थलों के लिए भी जाना जाता है. मानसून के दौरान यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है और आसपास की जगहें देखने लायक बन जाती हैं.
- मावजिम्बुइन गुफा (Mawjymbuin Cave), जो प्राकृतिक रूप से बने स्टैलेग्माइट के लिए प्रसिद्ध है.
- नोहकलिकाई फॉल्स (Nohkalikai Falls), जो सोहरा (चेरापूंजी) के पास स्थित भारत के सबसे ऊंचे झरनों में से एक है
- सेवन सिस्टर्स फॉल्स (Seven Sisters Falls), जो अपनी शानदार प्राकृतिक खूबसूरती के लिए मशहूर है.
- लिविंग रूट ब्रिज, जिन्हें जनजाति ने पेड़ों की जड़ों से तैयार किया है.
- धुंध से ढकी घाटियों के खूबसूरत नजारों वाले व्यू प्वाइंट्स.
मौसिनराम घूमने का सबसे अच्छा समय
अगर आप मौसिनराम में मानसून का असली जादू देखना चाहते हैं, तो जून से सितंबर के बीच यात्रा की योजना बनाएं. इसी दौरान यहां सबसे ज्यादा बारिश होती है और पूरा इलाका बादलों, हरियाली और झरनों से भर जाता है. हालांकि, इस मौसम में यात्रा करते समय रेनकोट, छाता और वाटरप्रूफ कपड़े साथ रखना जरूरी है, क्योंकि यहां कभी भी बारिश शुरू हो सकती है. वहीं, अगर आप कम बारिश और साफ मौसम में मेघालय की खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं, तो अक्टूबर से फरवरी के बीच का समय बेहतर माना जाता है. इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और घूमने-फिरने में भी आसानी होती है.
कैसे पहुंचें
हवाई अड्डा- गुवाहाटी (Lokpriya Gopinath Bordoloi International Airport) या शिलांग (Umroi Airport), जहां से टैक्सी मिलती है.
निकटतम रेलवे स्टेशन- गुवाहाटी रेलवे स्टेशन
सड़क मार्ग- मेघालय की राजधानी शिलांग से मौसिनराम की दूरी लगभग 60 से 70 किलोमीटर है, जिसे सड़क मार्ग (टैक्सी या बस) द्वारा 2 से 2.5 घंटे में तय किया जा सकता है.
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