
किसी समूह में बैठकर दर्द भरा संगीत सुनने और दुखद चीजों के बारे में बात करने से लोगों को और ज्यादा उदासी महसूस होती है. एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि युवाओं में समूह में बैठकर संगीत सुनने की आम प्रवृत्ति होती है और यह युवाओं के लिए संगीत और सामाजिक सरोकार दोनों के सापेक्ष महत्व को दर्शाता है.
ऑस्ट्रेलिया के मिलपेरा स्थित वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी से ताल्लुक रखने वाली शोधकर्ता सैंड्रा गैरिडो ने कहा कि शोध का यह निष्कर्ष अवसादग्रस्त लोगों को संगीत का उपयोग करने के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है.
उन्होंने कहा कि संवेदनशील व्यक्तियों को समूह में चिंतन करने से नकारात्मक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही ऐसे लोगों के अंदर नकारात्मक विचार व भावनाएं बढ़ सकती हैं.
इस शोध में यह भी सामने आया कि समूह के बीच बैठकर प्रेरक और आनंददायक संगीत सुनने या सुखद जीवन के बारे में हो रही चर्चाओं में शामिल होने से लोगों को अच्छा महसूस होता है. शोध का निष्कर्ष 'फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. (एजेंसियों से इनपुट)
ऑस्ट्रेलिया के मिलपेरा स्थित वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी से ताल्लुक रखने वाली शोधकर्ता सैंड्रा गैरिडो ने कहा कि शोध का यह निष्कर्ष अवसादग्रस्त लोगों को संगीत का उपयोग करने के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है.
उन्होंने कहा कि संवेदनशील व्यक्तियों को समूह में चिंतन करने से नकारात्मक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही ऐसे लोगों के अंदर नकारात्मक विचार व भावनाएं बढ़ सकती हैं.
इस शोध में यह भी सामने आया कि समूह के बीच बैठकर प्रेरक और आनंददायक संगीत सुनने या सुखद जीवन के बारे में हो रही चर्चाओं में शामिल होने से लोगों को अच्छा महसूस होता है. शोध का निष्कर्ष 'फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. (एजेंसियों से इनपुट)
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