आज के समय में ऑनलाइन ग्रॉसरी शापिंग ने हमारी जिंदगी को काफी आसान बना दिया है. अब किसी भी वक्त हमको घर पर बैठे-बैठे अपनी जरूरत का सामान मिल जाता है. फिर वो चाहे अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट से अपनी पसंद का खाना मंगा कर खाना हो या फिर घर की ग्रॉसरी के सामान से लेकर जरूरत की चीजें. बस फोन उठाया और फूड डिलीवरी और ग्रॉसरी डिलीवरी वाली ऐप से सामान को कार्ट में ऐड कर के ऑर्डर कर दिया. लेकिन इस आराम ने धीरे-धीरे मुझे आलसी बनाने के साथ ही मेरी जेब पर भी बहुत असर डाला. मेरे खर्चे ज्यादा होने लगे. और मेरी हेल्थ पर भी असर पड़ा है. सामान लेने जाने के लिए जो मैं थोड़ा-बहुत वॉक कर भी लेती थी वो भी अब नहीं हो पा रही थी.
ऑनलाइन शॉपिंग बन गई है आदत

आजकल की लाइफ में ऑनलाइन ग्रॉसरी और फूड डिलीवरी हमारी एक आदत बन चुकी है. मैं भी उस आदत का शिकार थी, उन्हीं लोगों में से एक थी जो छोटी से छोटी चीज के लिए ऐप खोल कर सामान ऑर्डर कर लेती थी. फिर वो चाहे दूध हो, सब्जी हो या फिर बाहर का खाना. बस एक क्लिक और घर में सारा सामान आ जाता था. शुरू में ये सब बहुत आसान और सुविधाजनक लगता था, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर मेरी लाइफ पर भी दिखने लगा.

जेब पर और सेहत पर पड़ा असर
इसका सबसे पहला असर मेरी जेब पर बड़ा. इन ऐप्स में एक फ्री डिलीवरी के लिए एक पर्टिक्युलर अमाउंट की शॉपिंग करनी ही होती थी. और फ्री डिलीवरी के लिए हर बार चीजें ऐड कर लेती थी, कभी कुछ चीजें जरूरत की होती थीं, तो कुछ बस ऐसे ही. ये सब करते-करते बिल बढ़ता ही चला जाता था. ऑफर्स और डिस्काउंट के चक्कर में हर बार ही जरूरत से ज्यादा सामान खरीद लेती थी. हालांकि हर रोज इसका कोई खासा फर्क नहीं समझ आता था, लेकिन महीने के आखिर में जब खर्च जोड़ती, तो खुद ही हैरान हो जाती थी.

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इसका दूसरा बड़ा असर मेरी हेल्थ पर पड़ा. पहले मैं खुद से बाजार जाकर सामान खरीदती ती, जिससे थोड़ी-बहुत वॉक हो जाती थी. लेकिन इस ऑनलाइन शॉपिंग की वजह से वो भी बंद हो गया. पूरे दिन घर पर बैठे रहना और हर चीज घर के दरवाजे पर मिल जाना मुझे आलसी बना रहा था. इन्हीं सबको देखते हुए मैनें अपनी इस आदत को बदलने का सोचा.
120 दिनों कर ऑनलाइन शॉपिंग बंद

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इस आदत को छोड़ना मुश्किल था, लेकिन अपनी आदत को बदलने की मैने ठान ली थी, जिसके चलते मैंने एक फैसला लिया, और 120 दिनों तक ऑनलाइन शॉपिंग को पूरी तरह से बंद कर दिया. हालांकि शुरुआत में ऐसा करना मुझे थोड़ा मुश्किल लगा. लेकिन फिर भी मैनें खुद को रोका और घर के नीचे बनी मार्केट जाकर खुद से सामान खरीदना शुरू किया. जिसकी वजह से धीरे-धीरे मुझे इसका फर्क महसूस होने लगा. मेरी इस आदत ने मेरे खर्चे कम करे. क्योंकि हम जब भी बाहर से सामान लेने जाते हैं तो सिर्फ वही सामान लेते हैं जो जरूरी होता है.
सेहत पर भी दिखा बड़ा असर

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दूसरा बड़ा फायदा हुआ मेरी हेल्थ को. सामान लेने जाने के लिए हर रोज घर से बाहर फ्रेश हवा में जाना और लोगों से मिलना अच्छा लगने लगा और मैं पहले से ज्यादा एक्टिव महसूस करने लगी. इन 120 दिनों ने मुझे ये सिखाया कि हर चीज में आसान रास्ता चुनना जरूरी नहीं होता. कभी-कभी थोड़ी मेहनत करना ही सही होता है. हालांकि ऐसा नहीं है कि मैने पूरी तरह से ऑनलाइन शॉपिंग करना बंद कर दिया है, मैं समय और जरूरत के हिसाब से सामान मंगाती हूं. जब बाहर जाकर सामान खरीदना पॉसिबल नहीं होता है.
Final Take Away- यह पूरा अनुभव मेरे लिए आंख खोलने वाला रहा, क्योंकि मैंने खुद अपनी रोजमर्रा की आदतों का असर महसूस किया. आज के समय में ऑनलाइन शॉपिंग पूरी तरह बुरी नहीं है, लेकिन हर चीज में बैलेंस जरूरी है. जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल करें, लेकिन रोजमर्रा की छोटी चीजों के लिए बाजार जाकर खरीदारी करना न सिर्फ खर्च कम करता है बल्कि शरीर को भी एक्टिव रखता है.
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