अक्सर कहा जाता है कि बुढ़ापे में व्यक्ति एक बच्चे जैसा बर्ताव करने लगता है. लेकिन बच्चों को समझाना और संभालना काफी आसान होता है लेकिन अगर बात बुजुर्गों की आए तो उन्हें समझाना छोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है. जिस तरह बचपन में बच्चा अपने माता-पिता से प्यार, अपनापन और अटेंशन चाहते हैं उसी तरह बुढ़ापे में बुजुर्ग भी अपने बच्चों से यही सब चीजों की उम्मीद करते हैं और जब उन्हें ये सभी चीजें नहीं मिल पाती तो वह काफी ज्यादा गुस्सा, चिड़चिड़ापन आदि दिखाने लगते हैं. बढ़ती उम्र में अकेलापन, हेल्थ रिलेटेड समस्याएं और परिवार के सदस्यों की बिजी लाइफस्टाइल उन्हें प्रभावित कर सकती है. इसका असर उनके व्यवहार में भी दिखाई देता है. ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देने जा रहे हैं जिससे आप अपने बुजुर्गों को खुश रख सकेंगे. आइए जानते हैं इन टिप्स के बारे में-
उनके साथ बिताएं समय
बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खुशी तब मिलती है, जब परिवार के सदस्य उनके साथ बैठकर बातें करते हैं. रोजाना कुछ समय निकालकर उनसे बातचीत करें, उनकी पुरानी बातों को सुनें और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें. इससे उन्हें यह महसूस होता है कि परिवार में उनकी अहमियत आज भी पहले जैसी ही है.
एक्टिव लाइफस्टाइल बनाने के लिए करें उन्हें प्रेरित
बढ़ती उम्र के कारण कई लोग फिजिकल एक्टिविटी कम कर देते हैं, जिससे हेल्थ रिलेटेड समस्याएं बढ़ने लगती हैं. ऐसे में उन्हें सुबह-शाम टहलने, हल्की एक्सरसाइज करने या योग करने के लिए मोटिवेट करें. रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी शरीर को हेल्दी रखने के साथ-साथ मेंटल स्ट्रेस भी कम करती हैं.
परिवार की जिम्मेदारियों में उनकी मदद लें
रिटायरमेंट के बाद कई बुजुर्ग खुद को बेकार महसूस करने लगते हैं. इस भावना को दूर करने के लिए उन्हें घर के छोटे-छोटे कामों में शामिल करें. जैसे किसी सामान की लिस्ट तैयार करना, बच्चों की पढ़ाई पर नजर रखना या घर के जरूरी कामों में सलाह देना. इससे उनका आत्मविश्वास बना रहता है और उन्हें अपनापन महसूस होता है.
रेगुलर हेल्थ चेकअप करवाएं
बढ़ती उम्र में हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का खतरा ज्यादा रहता है. इसलिए समय-समय पर डॉक्टर को दिखाएं. दवाइयों का सही समय पर खाना और बैलेंस डाइट का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. अगर किसी तरह की मानसिक परेशानी या याददाश्त में बदलाव दिखाई दे तो डॉक्टर की सलाह लें.
किसी भी फैसले में लें उनकी राय
घर के कोई भी जरूरी फैसले लेते समय बुजुर्गों से सलाह लेना उनकी भावनाओं का सम्मान करने का सबसे अच्छा तरीका है. चाहे बात फाइनेंशियल प्लानिंग की हो, बच्चों की पढ़ाई की या किसी फैमिली फंक्शन की, उनके अनुभव कई बार आपको सही दिशा दिखा सकते हैं. इससे उन्हें यह महसूस होता है कि परिवार में उनकी भूमिका आज भी उतनी ही जरूरी है.
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