Mother-Wife Relationship: शादी के बाद कई पुरुष ऐसी स्थिति में आ जाते हैं, जहां उन्हें लगता है कि मां और पत्नी के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो गया है. छोटी-छोटी गलतफहमियां कभी-कभी बड़े तनाव का कारण बन जाती हैं. अगर समय रहते इन बातों को समझदारी से नहीं संभाला जाए, तो इसका असर पूरे परिवार के माहौल पर पड़ सकता है. जानिए ऐसे आसान तरीके, जो रिश्तों में संतुलन और घर में शांति बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. इस बारे हमने बात की इंदौर बेस्ड रिलेशनशिप एक्सपर्ट विकास कुमार से.
मां और पत्नी के बीच किसी एक को चुनने की गलती न करें
कई लोग मान लेते हैं कि मां और पत्नी के बीच मतभेद होने का मतलब है कि उन्हें किसी एक का पक्ष लेना होगा. लेकिन हर विवाद जीत-हार का मामला नहीं होता. कई बार दोनों पक्षों की भावनाएं सही हो सकती हैं. ऐसे में पहले यह समझने की कोशिश करें कि असली समस्या क्या है और तनाव की वजह कहां से शुरू हुई.
टेक अवे क्या है- बिना पूरी बात सुने किसी एक के पक्ष में खड़े हो जाना स्थिति को और बिगाड़ सकता है.
हर बहस में जज बनने की जिम्मेदारी अपनी न समझें
परिवार के हर छोटे विवाद में फैसला सुनाने की भूमिका निभाना जरूरी नहीं होता. अगर हर बार आप ही तय करेंगे कि कौन सही है और कौन गलत, तो दोनों में से किसी एक को हमेशा यह महसूस हो सकता है कि उसके साथ न्याय नहीं हुआ.
टेक अवे क्या है- बेहतर यह है कि बातचीत का माहौल बनाएं, ताकि दोनों अपनी बात खुलकर कह सकें और समाधान मिल सके.
दोनों रिश्तों को समय देना क्यों है जरूरी
विकास कुमार कहते हैं कई बार विवाद की वजह सिर्फ यह महसूस होना होता है कि सामने वाला अब पहले जैसी अहमियत नहीं देता. अगर मां को लगे कि बेटा दूर हो गया है या पत्नी को लगे कि उसकी बात कभी नहीं सुनी जाती, तो छोटी बातें भी बड़ी बन सकती हैं.
टेक अवे क्या है- दोनों रिश्तों को समय देना और उनकी बात ध्यान से सुनना परिवार में संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है.
मां-पत्नी के विवाद में क्या करें? |
|---|
| किसी एक का पक्ष न लें |
| दोनों की बात ध्यान से सुनें |
| तुलना करने से बचें |
| निजी फैसलों की सीमाएं तय करें |
| सही समय पर बातचीत करें |
| जरूरत पड़ने पर फैमिली काउंसलर की मदद लें |
तुलना करने से क्यों बिगड़ सकते हैं रिश्ते
'मां तो हमेशा ऐसा करती थीं' या 'तुम्हें मां से सीखना चाहिए' जैसे वाक्य रिश्तों में दूरी बढ़ा सकते हैं. इसी तरह मां के सामने पत्नी की तुलना करना या पत्नी के सामने मां की आलोचना करना भी तनाव बढ़ा सकता है. हर व्यक्ति का स्वभाव और सोच अलग होती है.
टेक अवे क्या है- तुलना की बजाय सम्मानजनक संवाद ज्यादा कारगर होता है.

कुछ सीमाएं तय करना परिवार के लिए फायदेमंद हो सकता है
विकास कहते हैं हर परिवार की अपनी परंपराएं और तरीके होते हैं, लेकिन शादी के बाद नई जिम्मेदारियां भी जुड़ती हैं. ऐसे में कुछ बातों की सीमाएं तय करना जरूरी हो सकता है.
टेक अवे क्या है- उदाहरण के लिए, पति-पत्नी के निजी फैसलों में किसी दूसरे को दखल नहीं होना चाहिए और परिवार से जुड़े मुद्दों पर सभी की राय सुनी जाए.
गुस्से के बजाय सही समय पर करें बातचीत
अगर माहौल पहले से गर्म हो, तो उसी समय बहस करने से समस्या और बढ़ सकती है. बेहतर है कि सभी शांत होने के बाद आराम से बात करें.
टेक अवे क्या है- कई बार सही समय पर हुई छोटी-सी बातचीत भी लंबे समय से चली आ रही नाराजगी खत्म कर देती है.
जब बात न बने तो काउंसलर की मदद लेने में न हिचकिचाएं
अगर बार-बार एक ही तरह के विवाद हो रहे हैं और परिवार का माहौल लगातार खराब रहने लगा है, तो किसी भरोसेमंद बड़े, पारिवारिक सदस्य या फैमिली काउंसलर की मदद लेने में कोई बुराई नहीं है.
टेक अवे क्या है- सलाह उसी व्यक्ति से लें, जो हालात को समझता हो और दोनों पक्षों की बात निष्पक्ष होकर सुन सके. कई बार एक निष्पक्ष व्यक्ति की सलाह रिश्तों में आई खटास को कम करने में मदद कर सकती है.
बड़ा टेक अवे क्या है-
मां और पत्नी, दोनों ही आपकी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं. इसलिए कोशिश किसी एक का पक्ष लेने की नहीं, बल्कि दोनों रिश्तों को समझदारी से निभाने की होनी चाहिए. कई बार छोटी-सी समझदारी और खुलकर की गई बातचीत बड़े झगड़े होने से रोक सकती है.
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