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खुल जाएगी धूल, मिट्टी और प्रदूषण से बंद पड़ी नाक, आयुष मंत्रालय ने बताए जलनेति क्रिया के बड़े फायदे

Jala Neti Benefits: जलनेति सिर्फ एक घरेलू उपाय नहीं, बल्कि सदियों से अपनाई जा रही वैज्ञानिक और प्राकृतिक प्रक्रिया है. आइए जानते हैं इसे कैसे अपनाएं और फायदे क्या हैं.

खुल जाएगी धूल, मिट्टी और प्रदूषण से बंद पड़ी नाक, आयुष मंत्रालय ने बताए जलनेति क्रिया के बड़े फायदे
Jala Neti Benefits: जलनेति में गुनगुने नमक मिले पानी से नाक के रास्तों को साफ किया जाता है.

Jala Neti Technique Benefits: आज के समय में बढ़ता प्रदूषण, धूल-मिट्टी और एलर्जी की समस्या लगभग हर शहर में आम हो गई है. सुबह घर से निकलते ही धुआं, धूल और जहरीली हवा हमारी सांसों के साथ शरीर में प्रवेश कर जाती है. नतीजा नाक बंद रहना, बार-बार छींक आना, साइनस का दर्द, सिर भारी लगना और सांस लेने में परेशानी. ऐसे में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने एक प्राचीन और सरल योगिक विधि जलनेति को अपनाने की सलाह दी है. यह योग की शुद्धिकरण क्रियाओं में से एक जरूरी क्रिया है, जो नासिका मार्ग की गहराई से सफाई करती है और श्वसन स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है.

जलनेति सिर्फ एक घरेलू उपाय नहीं, बल्कि सदियों से अपनाई जा रही वैज्ञानिक और प्राकृतिक प्रक्रिया है. रेगुलर प्रैक्टिस से सांस स्वच्छ और सहज बनी रहती है, खासकर प्रदूषित शहरों में रहने वालों के लिए यह बेहद लाभकारी मानी जाती है.

जलनेति क्या है? (What is Jala Neti?)

जलनेति में गुनगुने नमक मिले पानी से नाक के रास्तों को साफ किया जाता है. इसके लिए एक विशेष पात्र, जिसे नेति पॉट कहा जाता है, का उपयोग किया जाता है. आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह क्रिया नाक के अंदर जमा धूल, प्रदूषण कण, एलर्जी पैदा करने वाले तत्व और अतिरिक्त म्यूकस (बलगम) को बाहर निकालने में मदद करती है. इससे नाक के मार्ग खुल जाते हैं और श्वसन तंत्र बेहतर काम करता है.

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जलनेति कैसे करें? (How to do Jala Neti?)

  • सबसे पहले कागासन मुद्रा में बैठें और पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें.
  • शरीर को थोड़ा आगे झुकाएं.
  • सिर को उस नासिका के विपरीत दिशा में झुकाएं जिससे सांस आसानी से आ रही हो.
  • नेति पॉट की टोंटी सक्रिय नासिका में लगाएं.
  • मुंह हल्का खोलें और मुंह से सांस लें-छोड़ें.
  • धीरे-धीरे पानी डालें, यह एक नासिका से अंदर जाएगा और दूसरी से बाहर निकलेगा.
  • आधा पात्र खाली होने पर नाक साफ करें और प्रक्रिया दूसरी तरफ दोहराएं.
  • अंत में कपालभाति प्राणायाम करें, ताकि बची हुई पानी की बूंदें निकल जाएं.

जलनेति करते समय सावधानियां:

  • पानी गुनगुना होना चाहिए, न ज्यादा गर्म न ठंडा.
  • एक लीटर पानी में लगभग आधा चम्मच नमक मिलाएं.
  • पहली बार किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में करें.
  • अगर नाक में गंभीर संक्रमण या सर्जरी हुई हो, तो डॉक्टर से सलाह लें.

जलनेति के प्रमुख लाभ (Major Benefits of Jala Neti)

1. नाक और साइनस की गहरी सफाई: यह धूल, प्रदूषण और बैक्टीरिया को बाहर निकालती है, जिससे साइनसाइटिस और एलर्जी में राहत मिलती है.

2. सर्दी-जुकाम और नाक बंद में आराम: रेगुलर अभ्यास से नाक बंद रहना, छींक आना और बलगम की समस्या कम होती है.

3. श्वसन तंत्र मजबूत: दमा और ऊपरी श्वसन संक्रमण में भी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह श्वास मार्ग को साफ रखता है.

4. सिरदर्द और माइग्रेन में राहत: नाक के मार्ग खुलने से सिर में भारीपन और दर्द कम हो सकता है.

5. मेंटल क्लियरिटी और एकाग्रता: जलनेति से ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है, जिससे दिमाग अधिक सक्रिय और शांत महसूस करता है. तनाव में कमी और एकाग्रता में वृद्धि देखी गई है.

6. नेत्र ज्योति में सुधार: योग शास्त्रों के अनुसार, रेगुलर प्रैक्टिस आंखों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है.

जलनेति एक सरल, सस्ती और प्राकृतिक विधि है, जिसे घर पर आसानी से अपनाया जा सकता है. आयुष मंत्रालय भी इसे डेली लाइफ का हिस्सा बनाने की सलाह देता है, खासकर उन लोगों के लिए जो प्रदूषित वातावरण में रहते हैं.

अगर सही तरीके और सावधानी के साथ रेगुलर रूप से किया जाए, तो जलनेति न केवल आपकी सांसों को स्वच्छ बनाती है, बल्कि मेंटल क्लियरिटी और ऑलओवर हेल्थ में भी सुधार ला सकती है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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