
चिकित्सकों और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण (Air Pollution) का चरम स्तर शहर में कोविड-19 (Covid 19) की स्थिति को बिगाड़ सकता है और सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती पैदा कर सकता है. शहर की भौगोलिक स्थिति, प्रतिकूल मौसम, पराली का जलाया जाना और प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों समेत कई कारणों से हर साल सर्दी के मौसम में दिल्ली की वायु गुणवत्ता का स्तर खतरनाक स्तर पर चला जाता है. उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित प्रदूषण नियंत्रण संस्था (Pollution Control Board) ने पिछले वर्ष नवम्बर में जन स्वास्थ्य आपात स्थिति की घोषणा की थी और दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में स्कूलों को बंद करने, निर्माण गतिविधियों और डीजल डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश दिये थे.
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आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल (Aakash Healthcare: Super Speciality Hospital) में पल्मोनोलॉजी विभाग (Department of Pulmonology) में सलाहकार डा. अक्षय बुधराजा ने कहा, कि वायु प्रदूषण से ‘क्रोनिक ब्रोंकाइटिस' और फेफड़ों की सूजन से पीड़ित लोगों के लिए एक गंभीर खतरा पैदा हो जाता है और ऐसे रोगियों को कोविड-19 का खतरा अधिक हो सकता है. उन्होंने कहा, कि यदि वे संक्रामक बीमारी के संपर्क में आ जाते है तो यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है. कोलंबिया एशिया अस्पताल (Columbia Asia Hospital), पुणे में सलाहकार, पल्मोनोलॉजी, डा. लक्ष्मीकांत कोटेकवार ने कहा, ‘‘अगर धूल से होने वाली एलर्जी का पिछला इतिहास है, तो यह अस्थमा के खतरे की ओर इशारा करता है.'' ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में शोधकर्ता संतोष हरीश ने कहा, कि इस साल आर्थिक गतिविधियों के कम होने के कारण प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत कम रहेगा. उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि वायु प्रदूषण से कोविड-19 संक्रमण की गंभीरता बढ़ने की आशंका है.''
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं