AI Summit India: जब भी भारत में कोई बड़ा टेक्नोलॉजी समिट आयोजित होता है, तो चर्चा आमतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप्स, निवेश और भविष्य की तकनीकों पर केंद्रित रहती है. मंच पर बड़े-बड़े नाम होते हैं, भविष्य की योजनाएं बनती हैं और नई खोजों की घोषणाएं होती हैं. लेकिन, हाल ही में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) से जुड़ा एक ऐसा पल सामने आया जिसने तकनीक से ज्यादा खाने-पीने की चर्चा छेड़ दी. इस बार सुर्खियों में न कोई नया सॉफ्टवेयर था और न कोई एआई मॉडल, बल्कि चर्चा थी दिल्ली के ताजे फलों के स्वाद की. एक विदेशी टेक लीडर ने दिल्ली में चखे फलों को लेकर जो बात कही, वह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लोगों ने इस पर खुलकर अपनी राय दी.
सारा हूकर ने की दिल से तारीफ
समिट में शामिल हुई Adaptation की को-फाउंडर और CEO सारा हूकर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर की. उन्होंने ताजे कटे फलों की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि दिल्ली की जिस चीज को वह सबसे ज्यादा मिस करेंगी, वह यहां के फल हैं जो सच में फल जैसे स्वाद देते हैं.
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जो लोग अमेरिका के बाहर बड़े हुए हैं, वे अक्सर यह महसूस करते हैं कि अमेरिका में मिलने वाले फल थोड़े सैनिटाइज्ड से लगते हैं, मतलब उनमें वह असली ताजगी, सुगंध और गहराई वाला स्वाद नहीं होता जो अन्य देशों में मिल जाता है. उनकी यह सादगी भरी बात लोगों को बहुत पसंद आई, क्योंकि यह किसी दिखावे की नहीं, बल्कि एक सच्चे अनुभव की बात थी.
One of the things I will miss the most about Delhi is fruit that tastes like fruit.
— Sara Hooker (@sarahookr) February 21, 2026
For anyone who grew up outside the US, there is the realization that in the US fruit somehow tastes like it was sanitized. pic.twitter.com/7RA2oW5Xfl
क्यों अलग होता है भारतीय फलों का स्वाद?
भारत में फलों की विविधता बहुत ज्यादा है. यहां अलग-अलग मौसम, मिट्टी और जलवायु के कारण हर क्षेत्र का स्वाद अलग होता है. आम, अमरूद, पपीता, केला या अनार, हर फल की अपनी खास खुशबू और मिठास होती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अभी भी कई जगहों पर पारंपरिक या देसी किस्मों की खेती होती है. इन किस्मों में स्वाद पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, जबकि कुछ विकसित देशों में फलों को ज्यादा समय तक टिकाऊ बनाने, आकार में समान रखने और दूर तक भेजने लायक बनाने पर जोर दिया जाता है.
इसी वजह से कई बार वहां के फल दिखने में बेहद आकर्षक और चमकदार होते हैं, लेकिन स्वाद में हल्के लग सकते हैं. वहीं भारतीय मंडियों में मिलने वाले फल भले ही आकार में एक जैसे न हों, लेकिन उनमें प्राकृतिक मिठास और सुगंध भरपूर होती है.

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़
सारा हूकर की पोस्ट कुछ ही घंटों में वायरल हो गई. हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी. कई यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताई. एक यूजर ने लिखा कि भारत में अभी भी देसी बीजों और स्थानीय किस्मों का इस्तेमाल होता है, जिससे स्वाद बरकरार रहता है. दूसरे यूजर ने कहा कि अमेरिका में फल और सब्जियां देखने में परफेक्ट होती हैं, लेकिन भारतीय बाजारों में मिलने वाली धनिया की खुशबू और टमाटर की असली मिठास की बात ही अलग है.
कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि भारतीय स्ट्रीट मार्केट का अनुभव ही अलग होता है, ताजा कटे फल, मसालों की खुशबू और लोगों की चहल-पहल मिलकर एक यादगार माहौल बना देती है.
एक छोटा अनुभव, बड़ा संदेश
यह घटना बताती है कि भारत की पहचान सिर्फ टेक्नोलॉजी या स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं है. यहां की संस्कृति, खानपान और प्राकृतिक स्वाद भी उतने ही खास हैं. एक विदेशी CEO का यह कहना कि वह दिल्ली के फलों को हमेशा मिस करेंगी, भारत के लिए एक तरह की तारीफ ही है.
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