अलमारी कपड़ों से भरी होने के बावजूद अगर आप भी अक्सर यह कहते हैं, “मेरे पास पहनने के लिए कुछ नहीं है”, तो दिल्ली की रहने वाली 32 वर्षीय काजल की कहानी आपको जरूर सोचने पर मजबूर कर सकती है. काजल गुरुग्राम की एक कंपनी में काम करती हैं और उन्हें फैशन का काफी शौक है. उन्हें हर दिन कुछ नया पहनना पसंद था, यही वजह है कि वह अक्सर ऑनलाइन और ऑफलाइन शॉपिंग करती रहती थीं. सेल, डिस्काउंट और नए ट्रेंड्स का लालच उन्हें हर महीने कई नए कपड़े खरीदने के लिए आकर्षित करता रहता था.
धीरे-धीरे कुछ सालों में उनकी अलमारी इतनी भर गई कि कपड़ों के लिए उन्हें अलग से स्टोरेज की जरूरत पड़ने लगी, लेकिन हैरानी वाली बात यह थी कि इतनी बड़ी कलेक्शन के बावजूद, हर सुबह ऑफिस के लिए तैयार होते समय उन्हें यह तय करने में काफी वक्त लग जाता था कि आखिर पहनें क्या?

डिक्लटर शुरू करने का फैसला
एक दिन उन्होंने अपनी पूरी अलमारी खाली की और कपड़ों को तीन हिस्सों में बांट दिया.
- पहले हिस्से में वे कपड़े रखे जिन्हें वह नियमित रूप से पहनती थीं.
- दूसरे हिस्से में वे कपड़े रखे गए जिन्हें पिछले एक साल से उन्होंने नहीं पहना था.
- तीसरे हिस्से में वे कपड़े थे जो या तो फिट नहीं आते थे या फिर उनकी पसंद से बाहर हो चुके थे.
सिर्फ 20-25% कपड़े ही काम आ रहे थे
इस प्रक्रिया के बाद काजल को एहसास हुआ कि वह अपनी अलमारी के केवल 20 से 25 प्रतिशत कपड़ों का ही इस्तेमाल कर रही थीं, बाकी कपड़े सिर्फ जगह घेर रहे थे, जिसके बाद उन्होंने कुछ कपड़ों को जरूरतमंद लोगों को दान कर दिया और कुछ कपड़ों को रिसाइकिल के लिए दे दिया.
शॉपिंग से पहले खुद से पूछे 3 जरूरी सवाल
काजल ने एक और बदलाव किया उन्होंने हर नया कपड़ा खरीदने से पहले खुद से तीन सवाल पूछना शुरू किया, क्या इसकी सच में जरूरत है? क्या इसे कम से कम 20 बार पहन सकूंगी? और क्या यह मेरी मौजूदा वॉर्डरोब के दूसरे कपड़ों के साथ आसानी से मैच हो जाएगा? अगर इन सवालों का जवाब "हां" होता, तभी वह खरीदारी करतीं.
कुछ ही महीनों में दिखा बड़ा बदलाव
ऐसे करते-करते कुछ ही महीनों में उनकी अलमारी पहले से कहीं ज्यादा व्यवस्थित हो गई. अब उन्हें तैयार होने में कम समय लगता है और बेवजह की शॉपिंग पर होने वाला खर्च भी काफी कम हो गया है. सबसे बड़ी बात यह कि अब उन्हें अपने कपड़ों को लेकर पहले जैसी उलझन महसूस नहीं होती.
अलमारी को समय-समय पर डिक्लटर करने से उन्हें क्या फायदे हुए?
सामान आसानी से मिल गया
काजल ने बताया कि जब उन्होंने कपड़े और दूसरी चीजों को सही तरीके से रखा, तो जरूरत पड़ने पर उन्हें ढूंढने में समय बर्बाद नहीं हुआ, इससे उनके समय की बचत हुई.
अलमारी में जगह बनी
काजल ने बताया कि जो कपड़े वह पहनती नहीं थीं, उन्हें हटाने से अलमारी में काफी जगह बन गई.
कपड़े बेहतर हालत में मिले
सही तरीके से तह करके या हैंगर पर रखने से कपड़ों में कम सिलवटें पड़ीं और वे लंबे समय तक चले.
सुबह की भागदौड़ कम होती है
काजल ने बताया कि चाहे ऑफिस हो या कोई फंक्शन, कहीं भी जाने के लिए उन्हें तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगता.
स्ट्रेस कम महसूस हो सकता है
बिखरा हुआ माहौल कई लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर सकता है. साफ और व्यवस्थित अलमारी देखने से मन को सुकून मिलता है.
खरीदारी पर कंट्रोल
काजल का कहना था कि जब आपको पता होता है कि अलमारी में क्या-क्या मौजूद है, तो एक जैसी चीजें दोबारा खरीदने की संभावना कम हो जाती है.
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