Parenting Tips: आज के समय में माता-पिता के लिए सबसे बड़ा टास्क है बच्चों को पढ़ाना. छोटे बच्चों को पढ़ाते समय बहुत धैर्य और समझदारी से काम लेना होता है क्योंकि बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं. कई बार बच्चे अचानक ही बहुत चिड़चिड़े हो जाते हैं और पढ़ने के नाम पर सुस्त पड़ जाते हैं. इसके पीछे बहुत सारे कारण हो सकते हैं, लेकिन सबसे बड़ा कारण है पढ़ाई का दबाव महसूस करना.
क्यों बदलता है बिहेवियर
छोटे बच्चे अपनी भावनाओं को ठीक से बयां नहीं कर पाते हैं और इसी कारण है कि उनके व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिलता है. बच्चे पढ़ते समय चिड़चिड़े हो जाते हैं, बहुत ज्यादा गुस्सा करने लगते हैं, पढ़ते वक्त बहाने करते हैं, बार-बार थका हुआ महसूस करते हैं. बहुत से माता-पिता इसे आलस मानते हैं लेकिन यह आलस नहीं बल्कि पढ़ाई का अत्याधिक दबाव है. इसके पीछे बहुत सारे कारण हो सकते हैं, जैसे माता-पिता की बहुत ज्यादा उम्मीदें, बार-बार दूसरे से बच्चे की तुलना करना, बिना ब्रेक लिए पढ़ाई करना, या छोटी गलती पर ज्यादा डांट पड़ना. ऐसे में बच्चा पढ़ाई से भागता नहीं है, बल्कि पढ़ाई के नाम से डरने लगता है.

बच्चे को कैसे समझाएं
अब सवाल है कि ऐसे में बच्चे को कैसे समझे. इसके लिए माता-पिता को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा, जैसे बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना. बच्चे से खुलकर बात करें और ये जानें कि बच्चे के मन में क्या चल रहा है और वह किस चीज से परेशान हैं. दूसरा पढ़ाई के वक्त बच्चे के साथ सख्ती न बरतें. ज्यादा सख्ती बरतने से बच्चा मन से कमजोर और डरा हुआ महसूस करने लगता है. इसलिए बच्चों को प्यार से पढ़ाने और समझाने की कोशिश करें. ऐसा करने से बच्चे का आधा स्ट्रेस अपने-आप ही खत्म हो जाता है.
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बच्चों की लाइफस्टाइल
इसके साथ ही बच्चे की जीवनशैली में थोड़ा बदलाव करना भी जरूरी है. बच्चों को रोज सुबह कुछ बादाम और अखरोट खाने के लिए जरूर दें. इससे बच्चे का दिमाग तेज होगा और पढ़ाई में मन भी लगेगा. बच्चों को प्रकृति के साथ भी जोड़े और उनकी शारीरिक गतिविधि को भी बढ़ाए. उन्हें वह खेल खेलने दें जिससे बच्चे का शारीरिक विकास तेजी से हो.
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