Child Study Routine: क्या आप भी अपने बच्चे को समझा-समझा कर थक गए हैं कि पढ़ना उसके लिए कितना जरूरी है. क्यों बिना पढ़े उसका काम नहीं चल सकता. और घंटों के लेक्चर के बाद वह मोटिवेट तो हो जाता है. लेकिन रिपोर्ट कार्ड कुछ और ही कहता है. आप मार्च से ही परेशान और चिंता में हैं कि बच्चे के नंबर कम आ रहे हैं तो वह टॉपर कैसे बनेगा. तो हकीकत तो यह है कि पिछले साल के खराब मार्क्स सिर्फ एक बीता हुआ कल हैं. असली भविष्य आज के अनुशासन से बनता है. अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा इस साल टॉपर बने तो उसे डांटने के बजाय उसके डेली रूटीन में कुछ साइकोलॉजिकल और प्रैक्टिकल बदलाव करें.
रूटीन में लाएं ये बदलाव, टॉपर बनना तय | Child Study Routine Tips: Better Marks Without Pressure
बच्चे के खराब मार्क्स को दिल पर न लें :
कई बार बीते साल के कम मार्क्स को लेकर माता पिता और बच्चे दोनों तनाव में रहते हैं. लेकिन सच तो यह है कि पिछला रिजल्ट सिर्फ एक कागज का टुकड़ा था. असली खेल तो अब शुरू होता है. अगर आपका बच्चा पढ़ाई में थोड़ा पिछड़ गया है. तो उसे कोसने के बजाय उन गलतियों पर ध्यान दें जो पिछले साल हुई थीं. याद रखिए. हर नया साल एक नया मौका लेकर आता है. इस साल बच्चे पर दबाव बनाने के बजाय उसके डर को खत्म करें और उसे एक नयी शुरुआत करने के लिए प्रेरित करें.
पढ़ाई का सही रूटीन क्यों है ज़रूरी :
अक्सर बच्चे तभी पिछड़ते हैं जब उनके पास कोई साफ प्लान नहीं होता. जब पढ़ाई का कोई तय समय नहीं होता. तो बच्चे हमेशा कंफ्यूज रहते हैं. एक सही रूटीन बच्चे के दिमाग को अनुशासित बनाता है. रूटीन का मतलब यह नहीं कि उसे दिन भर किताब लेकर बिठाया जाए. बल्कि इसका मतलब है हर काम के लिए एक सही वक्त तय करना. जब बच्चे को पता होता है कि कब खेलना है और कब पढ़ना. तो उसका दिमाग ज्यादा फोकस कर पाता है.

मोबाइल और स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल :
आजकल पढ़ाई में सबसे बड़ी रुकावट मोबाइल और सोशल मीडिया है. अगर बच्चा पढ़ते वक्त बार बार फोन देखता है. तो उसकी एकाग्रता बर्बाद हो जाती है. स्क्रीन टाइम को पूरी तरह बंद करने के बजाय उसे मैनेज करें. जैसे कि पढ़ाई के वक्त फोन दूसरे कमरे में रखें. दिन में सिर्फ एक या दो घंटे ही स्क्रीन एलाउड करें. स्क्रीन टाइम कम होते ही आप देखेंगे कि बच्चे की मेमोरी और फोकस दोनों बढ़ने लगे हैं.
पढ़ाई और ब्रेक का बैलेंस बनाएं :
बच्चे के दिमाग की भी एक लिमिट होती है. लगातार तीन चार घंटे पढ़ने से दिमाग थक जाता है और कुछ भी याद नहीं रहता. इसके लिए पोमोडोरो तकनीक का इस्तेमाल करें. जैसे 40 मिनट की पढ़ाई के बाद 10 मिनट का छोटा ब्रेक दें. इस ब्रेक में बच्चा थोड़ा टहल सकता है. पानी पी सकता है या संगीत सुन सकता है. ऐसे छोटे ब्रेक्स दिमाग को फ्रेश रखते हैं और लंबे समय तक याद रखने में मदद करते हैं.
नींद और खान पान का असर पढ़ाई पर :
क्या आपका बच्चा देर रात तक जागता है. अगर हां तो यह उसकी पढ़ाई के लिए सबसे खतरनाक है. दिमाग को नयी जानकारी सेव करने के लिए कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद चाहिए होती है. इसके अलावा जंक फूड और ज्यादा चीनी वाली चीजों से बच्चे को सुस्ती आती है. उसे ड्राई फ्रूट्स. फल और घर का बना पौष्टिक खाना दें. अच्छी नींद और सही पोषण से बच्चे की ग्रास्पिंग पावर यानी समझने की शक्ति दुगनी हो जाती है.
बच्चे को मोटिवेट कैसे करें, प्रेशर नहीं दें :
टॉपर बनने की होड़ में हम अक्सर बच्चों पर इतना दबाव डाल देते हैं कि वे डर के मारे पढ़ना ही छोड़ देते हैं. बच्चे को यह एहसास दिलाएं कि आप उसके साथ हैं. उसकी छोटी छोटी कामयाबियों पर उसे शाबाशी दें. जब बच्चा मोटिवेट महसूस करता है. तो वह खुद ब खुद पढ़ने के लिए बैठता है. तनाव मुक्त माहौल में की गयी पढ़ाई ही असली रिजल्ट लेकर आती है. बस उनके रूटीन में ये छोटे बदलाव करके देखिए. आपका बच्चा नए साल में ज़रूर टॉपर बनेगा.
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