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छोटे बच्चों को स्क्रीन कब दिखानी चाहिए? डॉक्टर रवि मलिक ने बताया किन बातों का रखें ध्यान

आजकल के दौर में मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम्स छोटे बच्चों के जीवन का हिस्सा बनते जा रहे हैं. ऐसे में उनके स्क्रीमटाइम का ध्यान रखना पैरेंट्स की बड़ी जिम्मेदारी होती है.

छोटे बच्चों को स्क्रीन कब दिखानी चाहिए? डॉक्टर रवि मलिक ने बताया किन बातों का रखें ध्यान
बच्चों का स्क्रीनटाइम कितना होना चाहिए?
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आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, टीवी और टैबलेट बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं. लेकिन क्या छोटे बच्चों को स्क्रीन दिखाना सही है. कई बार माता-पिता खुद व्यस्त रहते हैं और बच्चों को अपना मोबाइल दे देते हैं. इससे बच्चे घंटों तक लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं. इसके अलावा कुछ बच्चे मोबाइल-टैबलेट के बिना खाना भी नहीं खाते हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको छोटे बच्चों को स्क्रीन दिखाने के 5 जरूरी नियम बताने जा रहे हैं. इसकी जानकारी पीडियाट्रिशियन डॉक्टर रवि मलिक ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से दी है. आइए जानते हैं...

1. दो साल से कम उम्र के बच्चों को बिल्कुल न दिखाएं स्क्रीन

डॉक्टर रवि मलिक बताते हैं कि दो साल से छोटे बच्चे को 1 मिनट भी स्क्रीन नहीं दिखानी चाहिए. वहीं, 2 से 5 साल के बच्चों को केवल 1 घंटा स्क्रीन दिखाई जा सकती है. इसके अलावा 5 से 12 साल के बच्चों को 2 घंटे तक स्क्रीन दिखा सकते हैं. 

2. इस समय पर न दें स्क्रीन टाइम

अक्सर पैरेंट्स बच्चों को खाना-खिलाने के लिए मोबाइल-टैबलेट दे देते हैं. लेकिन डॉक्टर रवि मलिक बताते हैं कि मील के दौरान बच्चों का स्क्रीनटाइम बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए. 

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3. सोने से पहले न दिखाएं फोन

डॉक्टर रवि मलिक बताते हैं कि छोटे बच्चों को सोने से 1 घंटा पहले तक बच्चों को स्क्रीन नहीं दिखानी चाहिए. इससे छोटे बच्चों की नींद और स्लीप साइकिल पर असर पड़ सकता है.

4. को-व्यूइंग स्क्रीन

डॉक्टर रवि मलिक ने बताया कि बच्चों को अनसुपरवाइज स्क्रीन बिल्कुल नहीं दिखानी चाहिए. बच्चों को हमेशा को-व्यूइंग स्क्रीन ही दिखाएं. इसका मतलब है कि ऐसी स्क्रीन जो बच्चे के साथ-साथ पैरेंट्स भी देख सकें. साथ ही पैरेंट्स को भी यह जरूर पता होना चाहिए कि बच्चा स्क्रीन पर क्या देख रहा है.

5. स्क्रीन टाइम में क्या-क्या शामिल होता है?

डॉक्टर रवि मलिक बताते हैं कि पैरेंट्स को यह समझना चाहिए कि स्क्रीन टाइम में सिर्फ मोबाइल ही नहीं, बल्कि वीडियो गेम्स, कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट और आईपैड जैसी सभी स्क्रीन शामिल होती हैं. बच्चे द्वारा इन सभी डिवाइसों पर बिताया गया कुल समय ही उसका स्क्रीन टाइम माना जाता है.

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