90 का दशक हमारी-आपकी यादों में तस्वीर बन कर छपा है. बचपन की वो बातें, वो यादें और परिवार का वो साथ, आंखें बंद करने भर से वह किसी फिल्म की तरह सामने आने लगती हैं. आप भी उन यादों से परिचित होंगे. उस दौर में मिडिल क्लास घरों का नजारा लगभग एक सा होता था. करीने से सजाए गए घर में महंगे सोफे और फर्नीचर नहीं होते थे, लेकिन फिर भी घर सुकून का ठिकाना लगता था. कुछ परफेक्ट नहीं था लेकिन उन इंपरफेक्शन में ही हम खुश थे, क्योंकि सब साथ थे. आज लग्जरी है लेकिन परिवार साथ नहीं रहते. नब्बे के दशक की कुछ यादें हैं, जो आपको भी उस दौर में ले जाती होंगी.
90 के दशक की वो यादगार चीजें, जो हर घर में होती थीं | 1990s Things Found In Every Home
स्टील की अलमारी
मम्मी का पिटारा यानी घर की वह स्टील वाली अलमारी. ये घर का सबसे मजबूत कोना भी होता था, जिसकी चाबी मां के कमर में बंधी रहती थी. लेकिन ये कमर से उतर जाती तो उसे ढूंढना एक बड़ा टास्क होता था.
शीशे वाला डिनर सेट
वो खास शीशे या मेलामाइन का डिनर सेट, जिसे मेहमानों के आने पर ही डाइनिंग टेबल पर सजाया दिया जाता था. इससे पहले ये शो-केस की शोभा बढ़ाया करता था. इन शीशे के बर्तनों के बाहर निकलना का बच्चे इंतजार किया करते थे.
ढका हुआ फ्रिज
फ्रिज के ऊपर सुंदर कढ़ाई वाला कवर और उसके ऊपर रखे जाने वाला फ्लावर वॉश या दूसरे सजावटी सामान याद हैं आपको? कभी-कभी तो फ्रिज का स्टेबलाइजर भी, फ्रिज के ऊपर ही रखा होता था. ये फ्रिज न केवल ठंडा पानी और बर्फ बनाता था बल्कि घर की शोभा भी बढ़ाता था.
ब्लैक एंड व्हाइट टीवी
टीवी पहले न केवल मनोरंजन का साधन हुआ करता था बल्कि परिवार को एक साथ लाने का जरिया था. चाहे महाभारत-रामायण सीरियल हो या चित्रहार या शनिवार शाम आने वाली फिल्म, जिसका बच्चे पूरे हफ्ते इंतजार करते थे. टीवी परिवार को एक साथ जोड़ता और साथ समय बिताने का जरिया बनता.
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