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AI की मदद से सुनाई देगी आवाज, सरकारी अस्पताल में 3 साल की बच्ची को मिला पहला स्मार्ट कोक्लियर इम्प्लांट

करीब तीन घंटे तक चली इस सर्जरी के बाद बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है. डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले लगभग 21 दिनों के भीतर बच्ची सुनना और धीरे-धीरे बोलना भी शुरू कर सकती है.

AI की मदद से सुनाई देगी आवाज, सरकारी अस्पताल में 3 साल की बच्ची को मिला पहला स्मार्ट कोक्लियर इम्प्लांट
डॉक्टरों के अनुसार बच्ची जन्मजात सुनने की समस्या से पीड़ित थी.

तकनीक आज हेल्थ सर्विसेज को तेजी से बदल रही है. खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इलाज के कई नए रास्ते खोल दिए हैं. अब वही तकनीक उन बच्चों के जीवन में भी उम्मीद की नई रोशनी ला रही है, जो जन्म से सुनने की समस्या से जूझते हैं. राजस्थान में हाल ही में एक ऐसी ही बड़ी उपलब्धि सामने आई है. राज्य के सरकारी अस्पतालों में पहली बार AI-बेस्ड स्मार्ट कोक्लियर इम्प्लांट की सफल सर्जरी की गई है. राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) में डॉक्टरों की टीम ने तीन साल की एक बच्ची के कान में यह मॉडर्न इम्प्लांट लगाया. करीब तीन घंटे तक चली इस सर्जरी के बाद बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है. डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले लगभग 21 दिनों के भीतर बच्ची सुनना और धीरे-धीरे बोलना भी शुरू कर सकती है.

क्या था बच्ची की समस्या?

डॉक्टरों के अनुसार बच्ची जन्मजात सुनने की समस्या (Congenital Hearing Impairment) से पीड़ित थी. शुरुआत में वह कुछ आवाजें महसूस कर सकती थी, लेकिन दो साल की उम्र के बाद उसकी सुनने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो गई. ऐसी स्थिति में बच्चों के लिए सामान्य तरीके से बोलना और भाषा सीखना बहुत मुश्किल हो जाता है. इसलिए समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है.

क्या है कोक्लियर इम्प्लांट?

कोक्लियर इम्प्लांट एक खास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो उन लोगों की मदद करता है जिनकी सुनने की क्षमता बहुत कम या लगभग खत्म हो चुकी होती है. यह उपकरण कान के अंदर लगाए गए एक छोटे इम्प्लांट और बाहर लगे एक साउंड प्रोसेसर से मिलकर काम करता है. यह डिवाइस ध्वनि को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलकर सीधे श्रवण तंत्रिका (Auditory Nerve) तक पहुंचाता है, जिससे व्यक्ति आवाज को समझ पाता है.

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इस AI-बेस्ड इम्प्लांट की खासियत:

डॉक्टरों के अनुसार यह नया स्मार्ट कोक्लियर इम्प्लांट कई आधुनिक तकनीकों से लैस है.

1. हाई-स्पीड प्रोसेसिंग चिप

इस इम्प्लांट में एक तेज प्रोसेसिंग चिप लगी होती है जो आवाज की क्वालिटी को बेहतर बनाती है.

2. लंबी उम्र वाला इम्प्लांट

कान के अंदर लगाया गया इम्प्लांट करीब 30 साल तक काम कर सकता है, जबकि बाहर लगे साउंड प्रोसेसर की बैटरी लगभग तीन साल तक चल सकती है.

3. स्मार्ट नर्व टेक्नोलॉजी

यह तकनीक सर्जरी के दौरान सही जगह पर इम्प्लांट लगाने में डॉक्टरों की मदद करती है.

4. डेटा स्टोर करने की क्षमता

इस डिवाइस में मरीज का डेटा और मैपिंग स्टोर करने की सुविधा होती है, जिसे जरूरत पड़ने पर अपडेट भी किया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे स्मार्टफोन को अपडेट किया जाता है.

राजस्थान के लिए क्यों है यह बड़ी उपलब्धि?

राजस्थान मेडिकल एजुकेशन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह सर्जरी राज्य के सरकारी अस्पतालों में मॉडर्न मेडिकल सर्विस की दिशा में एक बड़ी कदम है.

अब तक इस तरह की एडवांस तकनीक आमतौर पर निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध होती थी. लेकिन, सरकारी अस्पताल में इसकी सफलता से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी आधुनिक इलाज का फायदा मिल सकेगा.

नई उम्मीद की शुरुआत

AI तकनीक के साथ किया गया यह कोक्लियर इम्प्लांट उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो सुनने की समस्या के कारण सामान्य जीवन से पीछे रह जाते हैं. अगर ऐसे इलाज सरकारी अस्पतालों में बढ़ते हैं, तो आने वाले समय में कई बच्चों को सुनने, बोलने और दुनिया से जुड़ने का नया मौका मिल सकता है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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