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UP Sipahi Bharti में पूछे जा रहे सवाल ज्यादा मुश्किल नहीं, एग्जाम की कहानी कैंडिडेट्स की जुबानी

उत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती परीक्षा में 32,000+ पदों के लिए 28 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं, जहां रीजनिंग और हिंदी को आसान, जबकि जीएस को अपेक्षाकृत कठिन बताया गया है. छात्रों के अनुसार, पेपर का कठिनाई स्तर बहुत अधिक नहीं था, जिससे इस बार कट-ऑफ काफी ऊपर जाने की संभावना है.

UP Sipahi Bharti में पूछे जा रहे सवाल ज्यादा मुश्किल नहीं, एग्जाम की कहानी कैंडिडेट्स की जुबानी
प्रश्न पत्र को लेकर परीक्षा देने आए छात्रों की राय NDTV ने ली तो उनका कहना था कि पेपर इस बार अच्छा आया है.

उत्तर प्रदेश में 32,000 से अधिक सिपाही पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा में 28 लाख अभ्यर्थी हिस्सा ले रहे हैं. सोमवार से शुरू हुई इस परीक्षा के दूसरे दिन, मंगलवार को भी राज्य के विभिन्न जिलों में परीक्षा केंद्रों पर भारी भीड़ उमड़ी. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच, पुलिस द्वारा केंद्रों में प्रवेश से पहले उम्मीदवारों की गहन चेकिंग की जा रही है. सुरक्षाकर्मी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के साथ आधार कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहे हैं, जबकि मेटल डिटेक्टर की मदद से सघन तलाशी ली जा रही है.

पेपर आसान है

इस दौरान सिपाही भर्ती परीक्षा के क्वेश्चन पेपर को लेकर NDTV ने अभ्यर्थियों की राय जानी तो उनका कहना था कि पेपर इस बार अच्छा आया है. लखनऊ के रहने वाले आकाश का कहना है क्वेश्चन पेपर बहुत डिफिकल्ट नहीं है, बल्कि रिजनिंग का हिस्सा इंटरेस्टिंग था. वहीं, लखनऊ के ही दूसरे अभ्यर्थी अमन का कहना है कुछ एक प्रश्नों को छोड़ दें तो पेपर आसान था. इस बार कट ऑफ काफी ऊपर जाएगी.

फिजिकल टेस्ट है ज्यादा जरूरी

इस दौरान एक सौरभ जो कि लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं का कहना है लिखित परीक्षा उनके लिए बड़ी चुनौती नहीं है. वो आसान है. उनके अनुसार बाकी परीक्षाओं की तुलना में फिजिकल टेस्ट सिपाही परीक्षा का ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिसकी तैयारी मजबूत तैयारी करनी होती है.

आसान है रिजनिंग 

छात्रों ने आगे बताया कि रीजनिंग के लगभग सारे सवाल आसान हैं, जिसमें कोडिंग-डिकोडिंग, कैलेंडर, लेटर सीरीज, अल्फाबेट सीरीज, ब्लड रिलेशन, वेन डायग्राम और भी सामान्य बौद्धिक क्षमता पर आधारित सवाल पूछे गए. मैथ्स की बात करें तो इसमें भी कुछ प्रश्न नए देखने को मिले, जैसे- प्रोबेबिलिटी (प्रायिकता), परम्यूटेशन कॉम्बिनेशन (क्रमचय और संचय) और बाकी सवाल आसान ही आए थे.

जीएस था कठिन

परीक्षा में आए अन्य छात्रों से जब हमने बात की तो उनका कहना है प्रश्न पत्र के अलग-अलग हिस्सों कहीं ज्यादा कठिन तो कहीं ज्यादा सरल थे हिंदी और मैथ्स को लेकर छात्रों की आम राय है कि जीएस की तुलना में काफी सरल थे. जीएस के प्रश्न काफी गहराई से पूछे गए थे, जिनका जवाब देने के लिए मुश्किलें आई.

हिंदी थी कठिन

वहीं, एमपी से लखनऊ आए हुए दो अभ्यर्थियों ने बताया कि पेपर सही था, लेकिन हम एमपी से हैं इसलिए हिंदी का फर्क पड़ा. क्योंकि मध्य प्रदेश में हिंदी नहीं पूछी जाती है. लेकिन यहां पर हिंदी से जुड़े प्रश्न अच्छे खासे थे.

इसके अलावा आजमगढ़ से आए हुए एक अभ्यर्थी ने बताया कि पिछली बार की तुलना में इस बार का पेपर आसान था. जीएस और मैथ भी मॉडरेट थे. साथ ही अभ्यर्थियों ने इस दौरान ट्रेन से अपने सफर को लेकर बताया कि पेपर देने आना था लेकिन ट्रेन में रिजर्वेशन मिला नहीं. किसी तरीके से एडजस्ट होकर हम लोग पेपर देने आए हैं.

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