- बिहार के किशु सिंह ने 14वीं कोशिश में SSB इंटरव्यू पास कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने का सपना पूरा किया
- किशु का परिवार कारोबार से जुड़ा है और उन्होंने कभी हार न मानने की सीख दी तथा मनोबल बनाए रखा
- किशु ने NDA और CDS की कई बार तैयारी की लेकिन शुरुआती चरणों में असफल रहे, फिर आत्मविश्लेषण कर सुधार किया
Success Story: बिहार के किशु सिंह की भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने की सक्सेस स्टोरी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो बार-बार असफल होने के बावजूद अपने सपने को नहीं छोड़ते. NDA से लेकर CDS तक कई कोशिशों में असफलता मिली, लेकिन परिवार का भरोसा और खुद पर विश्वास कायम रहा. आखिरकार 14वीं कोशिश में SSB इंटरव्यू पास कर किशु ने भारतीय सेना में अफसर बनने का अपना सपना पूरा कर लिया.
कारोबारी परिवार से मिली कभी हार न मानने की सीख
2 फरवरी 2002 को जन्मे किशु सिंह एक कारोबारी परिवार से आते हैं. उनके पिता और बड़े भाई ने कारोबार में मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्हें सिखाया कि चुनौती कितनी भी बड़ी हो, उसका सामना शांत दिमाग से करना चाहिए और कभी हार नहीं माननी चाहिए. किशु के मुताबिक उनकी सफलता में परिवार के भरोसे की सबसे बड़ी भूमिका रही. कई बार बेंगलुरु में SSB से बाहर होने के बाद जब वह घर लौटने के लिए ट्रेन की टिकट तलाश रहे होते थे, तब उनके पिता कहते थे कि ट्रेन नहीं, फ्लाइट की टिकट बुक करो. हर बार परिवार एयरपोर्ट पर मिठाई लेकर उनका स्वागत करता था, ताकि उनका मनोबल न टूटे.

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2011 में ‘बॉर्डर' फिल्म ने बदली जिंदगी
भारतीय सेना में जाने का सपना किशु के मन में साल 2011 में पैदा हुआ. भारतीय क्रिकेट टीम के विश्व कप जीतने के बाद पहली बार उनके मन में देशभक्ति की भावना जागी. कुछ महीनों बाद स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम से लौटने के बाद उन्होंने टीवी पर ‘बॉर्डर' फिल्म देखी. फिल्म में अक्षय खन्ना द्वारा निभाए गए सेकेंड लेफ्टिनेंट धर्मवीर के किरदार ने उन्हें बेहद प्रभावित किया. उसी समय उन्होंने तय कर लिया कि वह भारतीय सेना में अधिकारी बनेंगे.

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NDA से CDS तक जारी रहा संघर्ष
किशु ने सबसे पहले NDA की तैयारी शुरू की. कई प्रयासों के बाद भी SSB में सफलता नहीं मिली और NDA के प्रयास खत्म होने के बाद उन्होंने CDS की तैयारी शुरू की. लिखित परीक्षा के लिए उन्होंने पिछले 12-15 सालों के प्रश्नपत्र हल किए. अलग-अलग किताबों और ऑनलाइन स्रोतों से महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट मजबूत किए और हर विषय का कई बार रिवीजन किया.
रोजाना 10-12 घंटे तक पढ़ाई
NDTV से बातचीत में किशु बताते हैं कि उनकी दिनचर्या परीक्षा की जरूरत के हिसाब से बदलती रहती थी. रिटेन परीक्षा के दौरान पढ़ाई पर ज्यादा फोकस रहता था और साथ में शारीरिक व्यायाम भी जारी रखते थे. पीक तैयारी के दौरान वह सुबह करीब 5-6 घंटे गणित, फिर करीब 2 घंटे अंग्रेजी और अन्य विषयों के लिए 4-5 घंटे देते थे. लिखित परीक्षा के बाद उनका फोकस SSB और फिटनेस पर बढ़ जाता था.
अपनी रणनीति पर बात करते हुए किशु सिंह ने कहा कि ''मैंने बस यह स्वीकार किया कि कहीं न कहीं मुझमें कमी है. मैं अपना 100% देना चाहता था, खुद का आत्म-विश्लेषण किया, इंटरव्यू में अपनी खूबियों और कमियों को बताते समय ज़्यादा स्वाभाविक और पूरी तरह ईमानदार रहा, अपनी फिटनेस वगैरह में सुधार किया.

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चार महीने में 18 किलो वजन कम किया
SSB से पहले किशु ने फिटनेस पर भी खास ध्यान दिया. एक चोट के बाद लगातार आराम करने की वजह से उनका वजन बढ़ गया था. इंटरव्यू से पहले उन्होंने सिर्फ चार महीनों में 18 किलो वजन कम किया. रिटेन के बाद उन्होंने रनिंग, जिम, वॉकिंग और स्विमिंग की तीव्रता बढ़ा दी. उनका मानना है कि SSB केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और फिटनेस की भी परीक्षा है.
रिजल्ट आया तो रो पड़ा परिवार
14 फरवरी 2026 को चयन की खबर परिवार के लिए बेहद भावुक पल था. किशु बताते हैं कि उनके परिवार के लोग खुशी से रो रहे थे. मेडिकल तक चयन की जानकारी किसी को नहीं देने की योजना थी, लेकिन उनके बड़े भाई ने यह बात छिपाकर नहीं रखी. उन्होंने खुद को करीब 2-3 घंटे कमरे में बंद रखा और बाद में दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों समेत 100 से ज्यादा लोगों को किशु के चयन की जानकारी दे दी.
CDS अभ्यर्थियों को किशु की सलाह
किशु CDS की तैयारी कर रहे युवाओं से कहते हैं कि सबसे पहले PYQ के जरिए परीक्षा पैटर्न को समझें. अपनी ताकत, कमजोरी, हॉबी और रुचियों का आत्मविश्लेषण करें. वह युवाओं को अच्छी संगति में रहने, खेल और एक्स्ट्रा करिकुलर गतिविधियों में हिस्सा लेने और कम्युनिकेशन स्किल बेहतर करने की सलाह देते हैं.
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