विज्ञापन

क्या AI चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की जगह ले लेगा? एनडीटीवी की AI समिट में रॉकेट के फाउंडर ने बताया आने वाला चैलेंज

एनडीटीवी ने अपनी एआई समिट में चार्टर्ड अकाउंटेंट और एआई प्लेटफॉर्म रॉकेट के कोफाउंडर दीपक धनक से कुछ सवाल किए. जिस पर उन्होंने अपनी क्लियर राय रखी.

क्या AI चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की जगह ले लेगा? एनडीटीवी की AI समिट में रॉकेट के फाउंडर ने बताया आने वाला चैलेंज
दीपक का मानना है कि सिर्फ स्पीड या एफिशिएंसी से गेम नहीं जीता जाता.

India Ai Summit 2026 : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (Ai) आज हर फील्ड में तेजी से अपनी जगह बना रहा है. बड़ी-बड़ी कंपनियां नई टेक्नोलॉजी में इन्वेस्ट कर रही हैं और इसी वजह से जॉब सिक्योरिटी को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है. खासकर प्रोफेशनल सेक्टर में सवाल उठ रहा है कि क्या एआई इंसानों को रिप्लेस कर देगा? इसी मुद्दे पर एनडीटीवी ने अपनी एआई समिट में चार्टर्ड अकाउंटेंट और एआई प्लेटफॉर्म रॉकेट के कोफाउंडर दीपक धनक से कुछ सवाल किए, जिसपर उन्होंने अपनी क्लियर राय रखी.

यह भी पढ़ें- नौकरियों के लिए AI आपदा है या अवसर? NDTV AI Summit में टेक दिग्गजों ने दिया हर सवाल का जवाब

एआई किसी को नहीं, वर्किंग स्टाइल को बदलेगा

दीपक धनक ने कहा कि एआई या कोई भी टूल सीधे किसी व्यक्ति की जगह नहीं लेता. असल में वो प्रोफेशनल आगे बढ़ जाता है जो इन टूल्स को समझकर स्मार्ट तरीके से यूज करता है. यानी जो लोग खुद को अपडेट नहीं करेंगे, उनके लिए मुश्किल हो सकती है.

काम के दो हिस्से: नॉन-वैल्यू और रियल वैल्यू

उन्होंने समझाया कि हर जॉब में दो तरह के टास्क होते हैं. पहला वो काम जो जरूरी तो हैं लेकिन ज्यादा वैल्यू ऐड नहीं करते. दूसरा वो काम जिनमें डिसीजन मेकिंग, क्रिएटिविटी, गवर्नेंस, अकाउंटेबिलिटी और विजन शामिल होता है. यही असली ताकत है. आज की फास्ट पेस्ड दुनिया में हम छोटे छोटे प्रोसेस वाले कामों में इतने बिजी हो गए हैं कि असली टैलेंट दिखाने का टाइम ही नहीं मिलता. एआई ऐसे ही रूटीन टास्क संभाल सकता है. जिससे प्रोफेशनल्स को अपने कोर स्ट्रेंथ पर फोकस करने का मौका मिलेगा.

सिर्फ एफिशिएंसी नहीं, क्वालिटी भी जरूरी

दीपक का मानना है कि सिर्फ स्पीड या एफिशिएंसी से गेम नहीं जीता जाता. असली जीत सॉल्यूशन की डेप्थ, आउटपुट की क्वालिटी और क्लाइंट के यूज केस को सही तरीके से समझने में है. जो व्यक्ति अपने क्लाइंट की जरूरत को कॉन्टेक्स्ट के साथ समझेगा. वही बेस्ट रिजल्ट दे पाएगा.

क्या है ‘वाइब कोडिंग'?

उन्होंने ‘वाइब कोडिंग' का भी जिक्र किया. पहले वेबसाइट या सॉफ्टवेयर बनाने के लिए टेक्निकल नॉलेज जरूरी होता था. डिजाइन, कंटेंट, कोडिंग और डिप्लॉयमेंट सब अलग-अलग स्टेप्स थे. अब वाइब कोडिंग में आप सिर्फ नेचुरल लैंग्वेज में टाइप करके बता सकते हैं कि आपको क्या बनाना है. पीछे काम कर रहे एआई मॉडल्स आपकी इंटेंशन को समझकर उसे टेक्निकल स्पेसिफिकेशन में बदल देते हैं. दीपक ने कहा कि कोई भी अभी Rocket.new पर जाकर अपनी वेबसाइट आसानी से बना सकता है. 

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com