NDA Cadets Stipend: भारतीय थल सेना, नौसेना या वायुसेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना लाखों युवाओं का सपना होता है. इस सपने को पूरा करने के लिए युवाओं को एनडीए (NDA) परीक्षा, एसएसबी (SSB) इंटरव्यू और कड़े मेडिकल टेस्ट से गुजरना पड़ता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब कोई उम्मीदवार इन सभी मुश्किल स्टेप्स को पार करके ट्रेनिंग के लिए चुन लिया जाता है, तो क्या उसे ट्रेनिंग के दौरान भी पैसे मिलते हैं?
अक्सर लोगों को लगता है कि सैन्य अकादमियों में कैडेट्स सिर्फ कड़ी ट्रेनिंग और पढ़ाई करते हैं. लेकिन सच यह है कि सरकार ट्रेनिंग के दौरान भी कैडेट्स को आर्थिक मदद यानी स्टाइपेंड (Stipend) देती है. आइए जानते हैं कि एनडीए कैडेट्स को हर महीने कितनी राशि मिलती है और उनके हाथ में कितने रुपये आते हैं.
ट्रेनिंग के दौरान कितना मिलता है स्टाइपेंड?
7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक, जब एनडीए कैडेट्स अपनी शुरुआती ट्रेनिंग पूरी करके अंतिम चरण के लिए इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), एयर फोर्स एकेडमी (AFA) या इंडियन नेवल एकेडमी (INA) में पहुंचते हैं, तो उन्हें हर महीने 56,100 रुपये का स्टाइपेंड मिलना शुरू हो जाता है.
यह रकम पे मैट्रिक्स के 'लेवल-10' के तहत दी जाती है, जो सेना में एक नए अधिकारी (जैसे लेफ्टिनेंट) के शुरुआती मूल वेतन (Basic Pay) के बराबर होती है.
क्या कैडेट्स को मिलती है पूरी रकम?
भले ही सरकार की तरफ से 56,100 रुपये का स्टाइपेंड तय किया गया है, लेकिन कैडेट्स को यह पूरी रकम सीधे नहीं मिलती. इसमें से कुछ जरूरी कटौतियां की जाती हैं:
आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड (AGIF)
हर कैडेट और उसके परिवार की वित्तीय सुरक्षा के लिए बीमा (Insurance) कवर दिया जाता है. इसके लिए स्टाइपेंड से हर महीने करीब 7,000 से 8,000 रुपये काटे जाते हैं.
ग्रूमिंग और अन्य सुविधाएं
कैडेट्स की वर्दी, हेयरकट, लॉन्ड्री, खेल के सामान और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए भी स्टाइपेंड से एक तय रकम काटी जाती है.
इन-हैंड कितनी मिलती है सैलरी?
बीमा और अन्य जरूरी सुविधाओं के पैसे कटने के बाद, कैडेट्स को हर महीने करीब 10,000 से 15,000 रुपये कैश-इन-हैंड (खर्च के लिए) मिलते हैं.
रहने-खाने का पूरा खर्च उठाती है सरकार
कैडेट्स को मिलने वाली इन-हैंड राशि भले ही कम लगे, लेकिन आपको बता दें कि उनके रहने, खाने (मेस), मेडिकल सुविधा, ट्रेनिंग के सामान और वर्दी का पूरा खर्च सरकार खुद उठाती है.
जब कैडेट्स अपनी ट्रेनिंग पूरी कर लेते हैं और पासिंग आउट परेड के बाद थल सेना में लेफ्टिनेंट, नौसेना में सब-लेफ्टिनेंट या वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनते हैं, तब उनका यह स्टाइपेंड एक परमानेंट रेगुलर सैलरी में बदल जाता है. इसके बाद उन्हें मूल वेतन के साथ-साथ सरकार की तरफ से कई तरह के शानदार भत्ते (Allowances) भी मिलने लगते हैं.
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