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मेरिट लिस्ट में नाम, फिर भी बाहर होने का खतरा... MP के टीचर्स पर क्यों लटकी है तलवार?

MP Teacher Recruitment 2025: एमपी शिक्षक भर्ती 2025 में एक चेक बॉक्स की गलती 10 हजार अभ्यर्थियों के भविष्य पर भारी पड़ रही है. मेरिट में टॉप रैंक आने वाले कैंडिडेट्स भी स्पेशल डीएड के कन्फ्यूजन में बाहर हो सकते हैं. जानिए क्या है पूरा मामला.

मेरिट लिस्ट में नाम, फिर भी बाहर होने का खतरा... MP के टीचर्स पर क्यों लटकी है तलवार?
MP Teacher Recruitment 2025
AI Generated Image

MP Teacher Recruitment Controversy: मध्यप्रदेश में प्राइमरी शिक्षकों (वर्ग-3) की भर्ती का रिजल्ट आ चुका है, लेकिन खुशियों के बीच एक ऐसी खबर आई है, जिसने हजारों कैंडिडेट्स को टेंशन दे दिया है. वजह फॉर्म भरते समय हुई एक छोटी-सी गलती है. हालत ये है कि प्रदेश की मेरिट लिस्ट में टॉप रैंक लाने वाले भी सेलेक्शन प्रक्रिया से बाहर होने की कगार पर हैं. उनका पूरा भविष्य ही अधर में लटक गया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और अब आगे क्या होगा..

टीचर भर्ती की डिटेल्स

  • कुल पद- 13,089
  • स्कूल शिक्षा विभाग- 10,150 पद
  • जनजाति कार्य विभाग- 2,939 पद
  • योग्यता- D.El.Ed, B.El.Ed या Special D.El.Ed 
  • आवेदन की तारीख- 18 जुलाई से 1 अगस्त 2025 तक
  • परीक्षा- अक्टूबर 2025
  • कुल अभ्यर्थी- 1,03,494 उम्मीदवार
  • रिजल्ट- 27 फरवरी 2026 

क्या है पूरा मामला

जब 2025 में इस भर्ती के फॉर्म भरे जा रहे थे, तब वहां एक ऑप्शन 'स्पेशल डीएड' (Special D.Ed) का था. सामान्य डीएड एक डिप्लोमा कोर्स होता है. यह उन शिक्षकों के लिए होता है जो सामान्य बच्चों को पढ़ाते हैं. स्पेशल डीएड उन शिक्षकों के लिए है, जो दिव्यांग (Special Needs) बच्चों को पढ़ाने की ट्रेनिंग लेते हैं. इसके लिए RCI का सर्टिफिकेट जरूरी है.

चूक कहां हुई

फॉर्म भरते समय हजारों उम्मीदवारों ने अनजाने में या साइबर कैफे की गलती से 'स्पेशल डीएड' वाले कॉलम में 'Yes' पर टिक कर दिया, जबकि उनके पास 'सामान्य डीएड' की डिग्री थी. इस एक 'टिक' की वजह से उन्हें 5% बोनस अंक मिल गए. अब जब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की बारी आई है, तो उनके पास वो स्पेशल सर्टिफिकेट नहीं है. इसमें एक-दो हनीं करीब 10,000 कैंडिडेट्स फंस गए हैं. इससे उनका सेलेक्शन रद्द हो सकता है.

क्यों पैदा हुआ कन्फ्यूजन, चयन मंडल का क्या कहना है

कर्मचारी चयन मंडल का कहना है कि उन्होंने 26 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 और फिर 4 फरवरी से 11 फरवरी 2026 तक सुधार का मौका दिया था. विभाग के नियम कहते हैं कि गलत जानकारी देने पर उम्मीदवारी किसी भी लेवल पर खत्म की जा सकती है. कैंडिडेट्स की फैमिली का कहना है कि फॉर्म में सामान्य डिप्लोमा के लिए अलग से कोई साफ ऑप्शन नहीं दिख रहा था. कई उम्मीदवार गांवों में रहते हैं, उन्हें पता ही नहीं चल पाया कि बोर्ड ने बीच में सुधार के लिए दो बार पोर्टल खोला था.

क्या कोई ऑप्शन बचा है

मेरिट में आए हजारों उम्मीदवार ऐसे हैं, जो इस गलती की वजह से बाहर हो सकते हैं. इन अभ्यर्थियों की अब सरकार से सिर्फ एक ही मांग है कि उनकी मेहनत को एक मानवीय भूल की वजह से खराब न होने दिया जाए. हालांकि, सरकार और चयन मंडल की ओर से इसे लेकर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आई है. कर्मचारी चयन मंडल दूसरी बार करेक्शन का मौका देने के साथ ही ये साफ कर चुका है कि दोबारा इस तरह का दावा नहीं माना जाएगा.

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