आजकल युवा करियर चुनते समय अक्सर CA (चार्टर्ड अकाउंटेंट) और CS (कंपनी सेक्रेटरी) के बीच उलझ जाते हैं. इन दोनों ही प्रोफेशनल फील्ड में बहुत सम्मान मिलता है और अच्छी कमाई के मौके होते हैं. लेकिन इनकी पढ़ाई, जिम्मेदारियां और सैलरी पैटर्न अलग होते हैं. चलिए आज आपको हम बताते हैं कि CA और CS में क्या अंतर है और किसे ज्यादा सैलरी मिलती है.
दोनों में एजुकेशनल और प्रोफेशनल अंतर
CA बनने के लिए उम्मीदवार को अकाउंटिंग, टैक्स, ऑडिट और फाइनेंस के विषय अच्छे से सीखने होते हैं. इसके बाद उन्हें ICAI (Institute of Chartered Accountants of India) की परीक्षा पास करनी होती है. वहीं CS बनने के लिए उम्मीदवार को कंपनी लॉ, कॉर्पोरेट गवर्नेंस, सिक्योरिटीज नियम और कॉर्पोरेट फाइनेंस का ज्ञान होना जरूरी है. इसके लिए ICSI (Institute of Company Secretaries of India) की परीक्षा पास करनी होती है.
काम और जिम्मेदारियां
CA मुख्य रूप से कंपनियों के अकाउंट्स, टैक्सेशन, ऑडिट और फाइनेंशियल प्लानिंग में काम करते हैं. वे बिजनेस फाइनेंशियल एडवाइस भी देते हैं. CS मुख्य रूप से कंपनियों के कानूनी और कॉर्पोरेट मामलों को संभालते हैं. वे बोर्ड मीटिंग, शेयरहोल्डर की रिपोर्ट तैयार करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि कंपनी कॉर्पोरेट नियमों का सही पालन कर रही हो.
कितनी होती है सैलरी
आमतौर पर CA को CS की तुलना में ज्यादा सैलरी मिलती है. जहां CA की शुरुआती सैलरी ₹6-12 लाख सालाना तक हो सकती है, वहीं CS की ₹8-12 लाख सालाना के बीच होती है. जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, औसत सैलरी भी बढ़ती जाती है. MNC या कॉर्पोरेट कंपनियों में CA सालाना 12 से 25 लाख रुपये तक कमा सकते हैं. वहीं CS की सैलरी 8 से 20 लाख रुपये के बीच हो सकती है. कुछ ही सालों में ये सैलरी काफी ज्यादा बढ़ जाती है.
अगर आप फाइनेंस और अकाउंटिंग में इंटरेस्ट रखते हैं तो CA आपके लिए बेहतर विकल्प है. वहीं अगर आपकी रुचि कंपनी के कानूनी मामलों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में है, तो CS चुनना सही रहेगा.
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