CJI सूर्यकांत ने उस वकील पर क्या कहा, जिसने उन्हें कोर्ट में अपशब्द कहे और जज को बोला-मिस्टर ज्यूडिश्यिल सर्वेंट

सुप्रीम कोर्ट में 10 जुलाई को उस समय बहुत हंगामा हुआ था जब एक याचिकाकर्ता वकील ने सीजेआई सूर्यकांत को अपशब्द कहे और कोर्ट में रूम में कागज फेंकते हुए जजों को मिस्टर ज्यूडिश्यिल सर्वेंट कहा. यही नहीं वह खुद को सर्वोच्च बताते हुए जज को आदेश देने लगे. पढ़ें क्या था पूरा मामला और सीजेआई सूर्यकांत ने उन्हें क्या कहा...

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जस्टिस सूर्यकांत ने अपशब्द कहने वाले शख्स के लिए कही ये बात

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने पिछले सप्ताह कोर्ट में हुई घटना को लेकर सोमवार को चुप्पी तोड़ी, जिसमें उन्हें एक याचिकाकर्ता ने अपशब्द कहे और कोर्ट में कागज फेंके. उन्होंने घटना को नजरअंदाज करने के लिए कहा और बोले- ऐसी घटनाएं कभी-कभी हो जाती हैं. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि घटना को नजरअंदाज करें. युवा कभी-कभी युवा ऐसी हककतें कर देते हैं. उन्होंने आगे ये भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना ज्यादा जरूरी है. उन्होंने आगे कहा कि मैं यही कहना चाहूंगा कि हम सभी का कर्तव्य है कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखें. उनकी रक्षा और प्रतिष्ठा को बरकरार रखें.

अदालत में आखिर हुआ क्या था

बता दें कि 10 जुलाई के दिन सुप्रीम कोर्ट में उस समय जबरदस्त हंगामा हुआ जब एक याचिकाकर्ता वकील ने सीजेआई सूर्यकांत को अपशब्द कहे और कोर्ट रूम में कागज फेंके जिसके बाद कोर्ट की कार्यवाही में बाधा डालने के चलते सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बाहर कर दिया. प्रबल प्रताप नाम के एक याचिकाकर्ता ने पीठ के सामने खुद को 'सर्वोच्च' बताया. उन्होंने न्यायाधीशों को 'ज्यूडिश्यिल सर्वेंट'(Judicial Servants) कहर संबोधित किया.उन्होंने न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए कहा कि मिस्टर ज्यूडिश्यिल सर्वेंट मैं आपको लखनऊ के ASP के खिलाफ साइबर क्राइम में गिरोह चलाने के आरोप में FIR करने का आदेश देता हूं. इसके बाद हैरान जस्टिस केवी विश्वनाथन ने उनसे पूछा कि आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं? इसके बाद याचिकाकर्ता ने सीजेआई सूर्यकांत को अपशब्द कहना शुरू कर दिया और कागज हवा में फेंक दिए. अदालत के सुरक्षाकर्मियों उसे बाहर ले गए. उसे कुछ समय के लिए कोर्ट परिसर के भीतर डीएसपी के कार्यालय में हिरासत में रखा गया.अदालत की कार्यवाही में व्यवधान डाले जाने के बावजूद पीठ ने अवमानना या किसी अन्य दंडात्मक कार्यवाही को शुरू नहीं करने का निर्णय लिया. कोर्ट ने साथ ही ये टिप्पणी भी की कि वह बहुत परेशान हैं. ये सब उनकी हताशा है. हमें उनके प्रति सहानुभूति है.

बार एसोसिएशन ने इस घटना की निंदा की

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस घटना की कड़ी निंदा की. SCBA ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि अदालत की गरिमा का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए. कोर्ट की कार्यवाही में दुर्व्यवहार, धमकी या बाधा डालने का कोई भी प्रयास पूरी तरह अस्वीकार्य है. इस तरह के कृत्य न्याय की व्यवस्था और उसकी नींव पर प्रहार करता है. ऐसे आचरण से कानून के मुताबिक दृढ़ता और सख्ती से निपटा जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट आर्गुइंग काउंसिल एसोसिएशन ने भी सीजेआई सूर्यकांत को पत्र लिखकर उपद्रव में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी और सख्त कार्रवाई की मांग की थी.    

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