सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली महिलाओं को भी मातृत्‍व अवकाश का हक : उड़ीसा हाईकोर्ट 

किराये की कोख से मां बनने वाली जेना को ओडिशा सरकार में उनके उच्च अधिकारी ने 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने से मना कर दिया. इसलिए उन्होंने सरकार के विरूद्ध उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
हाईकोर्ट ने कहा कि सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली महिलाकर्मियों को मातृत्व अवकाश का अधिकार है. (प्रतीकात्‍मक)
भुवनेश्वर:

उड़ीसा उच्च न्यायालय (Orissa High Court) ने हाल में व्यवस्था दी है कि किराये की कोख के जरिए मां (Surrogacy Mother) बनने वाली महिला कर्मियों को वैसे ही मातृत्व अवकाश एवं अन्य लाभ पाने का अधिकार है जो प्राकृतिक रूप से बच्चे को जन्म देने वाली या बच्चा गोद लेकर मां बनने वाली महिलाओं को प्राप्त है.न्यायमूर्ति एस के पाणिग्रही की एकल पीठ ने 25 जून को ओडिशा वित्त सेवा की महिला अधिकारी सुप्रिया जेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी. याचिकाकर्ता ने 2020 में यह याचिका दायर की थी.

जेना किराये की कोख के जरिए मां बनीं लेकिन उन्हें ओडिशा सरकार में उनके उच्च अधिकारी ने 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने से मना कर दिया. इसलिए उन्होंने सरकार के विरूद्ध उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.

उच्च न्यायालय ने कहा कि जिस तरह प्राकृतिक रूप से मां बनने वाली सरकारी कर्मियों को 180 दिन का अवकाश मिलता है, उसी तरह एक साल उम्र तक के बच्चे को गोद लेने वाली सरकारी कर्मियों को भी उसकी (बच्चे की) देखभाल के लिए 180 दिन की छुट्टी मिलती है.

Advertisement

संतान की देखभाल के लिए अवकाश का प्रावधान नहीं : हाईकोर्ट 

उच्च न्यायालय ने कहा कि लेकिन किराये की कोख के माध्यम से प्राप्त संतान की देखभाल के लिए मातृत्व अवकाश का प्रावधान नहीं है.

Advertisement

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘यदि सरकार गोद लेकर मां बनने वाली महिला को मातृत्व अवकाश दे सकती है तो उस माता को मातृत्व अवकाश से वंचित करना सर्वथा अनपयुक्त होगा जिसे किराये की कोख देने वाली महिला के गर्भ में संतान पाने को इच्छुक दंपति के अंडाणु या शुक्राणु से तैयार भ्रूण के अधिरोपण के बाद इस प्रक्रिया से बच्चा मिला हो.''

Advertisement

समान बर्ताव के लिए दिया जाए मातृत्‍व अवकाश : उड़ीसा हाईकोर्ट 

उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी कि सभी नई माताओं के प्रति समान बर्ताव एवं सहायता सुनिश्चित करने के लिए उन (महिला) कर्मियों को भी मातृत्व अवकाश दिया जाए, भले ही वह किसी भी तरह मां क्यों न बनी हों.

Advertisement

उच्च न्यायालय ने कहा कि इन माताओं को मातृत्व अवकाश देने से यह सुनिश्चित होता है कि उनके पास अपने बच्चे के लिए स्थिर एवं प्यार भरा माहौल तैयार करने के लिए जरूरी वक्त होता है तथा जच्चा एवं बच्चा के कल्याण को बढ़ावा मिलता है.

उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को इस आदेश की सूचना मिलने के तीन महीने के अंदर याचिकाकर्ता को 180 दिन का मातृत्व अवकाश प्रदान करने का निर्देश दिया.

ये भी पढ़ें :

* "BJP को अब समर्थन नहीं, मजबूत विपक्ष की तरह करेंगे काम"... BJD सांसदों को नवीन पटनायक का मैसेज
* ओडिशा : बालासोर में सामान्य हो रहे हालात, कर्फ्यू में दी गई और ढील, जल्द इंटरनेट सेवा भी होगी बहाल
* किस राज्य से आ रही सबसे ज्यादा मछली? दाल उगाने में कौन नंबर-1, देखिए लिस्ट

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Featured Video Of The Day
Pahalgam Terror Attack: Santosh Jagdale के परिवार पर टूटा है दुखों का पहाड़, सरकार से मांग रहे मदद
Topics mentioned in this article